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परीक्षित मोक्ष के साथ श्रीमद्भागवत कथा का हुआ विश्राम, सुदामा चरित्र पर भावुक हुए श्रद्धालु

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बदायूं। शहर के रघुनाथ यानी पंजाबी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का सोमवार को परीक्षित मोक्ष के साथ विधिवत विश्राम हुआ। कथा के अंतिम दिवस सुदामा चरित्र का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और वातावरण दिव्य भक्ति रस से भर गया।

कथा व्यास मुमुक्ष कृष्ण दद्दा जी महाराज ने अपने सारगर्भित प्रवचनों में कहा कि “भगवान को अहंकार से नहीं, केवल भक्ति से पाया जा सकता है।” उन्होंने समझाया कि अहंकार ही भगवान का भोजन है—जहाँ अहंकार होता है, वहाँ भगवान की कृपा कम होती चली जाती है।

उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सुहागिन स्त्री का प्रधान धर्म पति की सेवा करना है। मन, वचन और कर्म से की गई पति सेवा किसी तीर्थ से कम नहीं। उन्होंने कहा कि “जो स्त्रियाँ पति सेवा करती हैं, उन्हें किसी तीर्थ की आवश्यकता नहीं रहती।”

दान और सहयोग के अंतर को स्पष्ट करते हुए महाराज जी बोले कि गरीबों का सहयोग किया जाता है, जबकि दान सदैव सुपात्र को ही दिया जाता है। संसार से वैराग्य और भगवान से अनुराग को उन्होंने भक्ति का असली लक्षण बताया।

कथा के दौरान खेली गई **फूलों की


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