— संवादाता : गोविन्द देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आज आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ करते हुए कहा कि “युगों युगों के शुभ कर्मों का मेल तभी होता है जब मनुष्य कर्मशील हो। संतुष्ट व्यक्ति समाज के लिए कल्याणकारी नहीं होता। जो व्यक्ति केवल प्राप्त से संतुष्ट हो जाए, वह पुरुषार्थ, ज्ञान, व्यापार और नवाचार में पीछे रह जाएगा। इसलिए मनुष्य को हर पल कर्मशील रहना चाहिए।”
सत्संग में डॉ. सत्यम आर्य ने कहा कि “स्वस्थ रहना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है। अस्वस्थ व्यक्ति समाज और राष्ट्र के लिए लाभकारी नहीं हो सकता। वास्तव में स्वस्थ वही रहता है जो चरित्रवान हो।”
सत्संग में श्रीमती कमलेश कुमारी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती गुड्डो रानी, श्रीमती सरोज देवी, श्रीमती सूरजवती देवी, कुमारी कौशिकी रानी, पंजाब सिंह, राकेश आर्य तथा आर्य संस्कारशाला के बच्चे भी उपस्थित रहे।
सत्संग का उद्देश्य न केवल धार्मिक क्रियाओं का पालन करना, बल्कि समाज में कर्मशीलता, स्वास्थ्य और चरित्र के महत्व को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना भी बताया गया।
Budaun Amarprabhat