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बिल्सी। गड़रपुरा में सात दिवसीय बौद्ध कथा में राजेश्वरी बौद्ध ने जीवन मूल्य और करुणा का संदेश दिया

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बिल्सी। तहसील क्षेत्र के गांव गड़रपुरा में आयोजित सात दिवसीय बौद्ध कथा के दौरान रविवार को कथावाचक राजेश्वरी बौद्ध ने भगवान गौतम बुद्ध के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।
गृह त्याग का प्रेरक संदेश
कथावाचक ने राजकुमार सिद्धार्थ के गृह त्याग प्रसंग को भावनात्मक और प्रेरक शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सुख-सुविधाओं से भरे राजमहल में रहते हुए भी सिद्धार्थ मानव जीवन के दुख, रोग, बुढ़ापा और मृत्यु के यथार्थ से व्यथित थे। संसार के दुखों से मुक्ति पाने के लिए उन्होंने पत्नी यशोधरा और पुत्र राहुल सहित राजवैभव का त्याग कर तप और साधना का मार्ग अपनाया। राजेश्वरी बौद्ध ने कहा कि गृह त्याग केवल संन्यास नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण के लिए किया गया महान संकल्प था।
करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग
कथावाचक ने भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और मध्यम मार्ग के सिद्धांतों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के भौतिकवादी युग में भी बुद्ध के विचार समाज को शांति और सद्भाव का मार्ग दिखाते हैं।
ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस मौके पर हरवीर शाक्य, चन्द्रपाल, किशन पाल, मोहनलाल, हरविलास, पानसिंह, सुनील, श्यामवीर, रामवीर, शिशुपाल आदि मौजूद रहे।


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