
श्रद्धालुओं ने लिया पंचशील और अष्टांगिक मार्ग अपनाने का संकल्प
संवादाता गोविंद देवल, बिल्सी
बिल्सी तहसील क्षेत्र के गांव गड़रपुरा में चल रही भगवान बुद्ध की कथा का अंतिम दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। समापन अवसर पर कथावाचक राजेश्वरी बौद्ध ने महिलाओं को धम्म दीक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से बताया और सरल शब्दों में भगवान बुद्ध के उपदेशों को समझाया।
कथावाचक ने कहा कि धम्म दीक्षा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन को सत्य, अहिंसा, करुणा और समता के मार्ग पर ले जाने का माध्यम है। उन्होंने समाज में समानता स्थापित करने और भेदभाव, हिंसा व अंधविश्वास को समाप्त करने के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से महिलाओं से आह्वान किया गया कि वे धम्म के सिद्धांतों को अपनाकर अपने परिवार और समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखें।
कथावाचक श्याम सुंदर बौद्ध ने बुद्ध के पंचशील और अष्टांगिक मार्ग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इन्हें अपनाने से व्यक्ति नैतिक और संयमित जीवन जी सकता है। कथा के दौरान बुद्ध वंदना की गई और उपस्थित श्रद्धालुओं ने बुद्ध द्वारा बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कथा के समापन पर प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर हरवीर शाक्य, रिंकू शाक्य, अवनेश कुमार, श्याम बहादुर, शंकर लाल, चन्द्रपाल, किशन पाल, मोहनलाल, हरविलास, पानसिंह, सुनील कुमार, श्यामवीर, रामवीर, शिशुपाल, धर्मेंद्र कुमार, विनोद कुमार, चंद्रभान सिंह सहित कई लोग उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat