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प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग, आचार्य संजीव रूप ने कर्म और पुरुषार्थ का दिया संदेश

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बिल्सी।
तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी गांव स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज के तत्वावधान में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने अथर्ववेद के मंत्रों के साथ यज्ञ संपन्न कराया।
यज्ञ के दौरान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य वही है जो अपने भाग्य का नित्य निर्माण करता है। जो लोग अपने भाग्य को कोसते रहते हैं, वे अभागे ही बने रहते हैं। माता-पिता, गुरु और भगवान हमारे सहायक होते हैं, लेकिन कर्म हमें स्वयं ही करना होता है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा था कि मैं तुम्हारा रथ तो हांकूंगा, लेकिन शस्त्र नहीं उठाऊंगा, युद्ध तुम्हें ही लड़ना होगा।
उन्होंने कहा कि जीवन भी एक संघर्ष है, जिसमें भगवान हमारे सारथी होते हैं, किंतु पुरुषार्थ मनुष्य को स्वयं करना पड़ता है। अच्छा बोलने, अच्छा देखने, अच्छा सुनने, सेवा, परोपकार, दान और दया से मनुष्य का भाग्य सुंदर बनता है।
कार्यक्रम में पं. प्रश्रय आर्य जय ने मधुर भजन प्रस्तुत कर उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। सत्संग में कु. तृप्ति शास्त्री, राकेश आर्य, विनीत कुमार सिंह, अनुज कुमार सिंह, श्रीमती सूरजवती देवी, सरोज देवी सहित आर्य संस्कारशाला के बच्चे व बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।


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