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मुरादाबाद : प्रो. आरके सरीन ने फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी में नैतिक जिम्मेदारी पर दिया गेस्ट लेक्चर

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मुरादाबाद। तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज़ के फॉरेंसिक साइंस विभाग में आयोजित गेस्ट लेक्चर में राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान यूनिवर्सिटी, दिल्ली कैंपस के प्रोफेसर एवं प्रतिष्ठित फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजिस्ट प्रो. आरके सरीन ने अपराध जांच और न्यायिक प्रक्रियाओं में फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी की भूमिका पर प्रकाश डाला।
प्रो. सरीन ने फोरेंसिक विशेषज्ञों की नैतिक जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए कहा कि टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि न्याय का मजबूत आधार होती है। उन्होंने बताया कि एक छोटी सी चूक, लापरवाही या पक्षपात पूरे केस की दिशा बदल सकता है। उन्होंने विशेषज्ञ गवाह के रूप में अदालत में प्रस्तुत होने को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा और जिम्मेदारी का परीक्षण बताया।
इस अवसर पर पैरामेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. नवनीत कुमार, एमएलटी की एचओडी डॉ. रूचि कांत और फॉरेंसिक विभाग के एचओडी श्री रवि कुमार ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मुख्य वक्ता प्रो. सरीन का पौधा भेंट कर स्वागत किया गया, जबकि स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
प्रो. सरीन ने बताया कि फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी केवल विषाक्त पदार्थों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि अपराध जांच, मृत्यु के कारणों की व्याख्या, न्यायिक प्रक्रियाओं में वैज्ञानिक साक्ष्य की प्रस्तुति और केस के पुनर्निर्माण में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने केस उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि कभी-कभी मामूली प्रतीत होने वाले रासायनिक अवशेष या शरीर के द्रवों में पाए गए सूक्ष्म घटक भी अपराध के घटनाक्रम को उजागर कर सकते हैं।
अंत में छात्रों ने विष विश्लेषण, विषों के शरीर में वितरण, लैब में प्रयोग किए जाने वाले प्रोटोकॉल, रिपोर्ट व्याख्या और विशेषज्ञ गवाही की प्रक्रिया से जुड़े सवाल पूछे। कार्यक्रम में समन्वयक श्री योगेश कुमार, फैकल्टी सदस्य सुश्री अंशिका श्रीवास्तव, सुश्री जयश्री, अजय प्रताप सिंह एवं फॉरेंसिक के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।


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