भक्ति से ही मिलता है धैर्य और जीवन में प्रसन्नता : पं. हर्षित उपाध्याय
सहसवान। नगर के अग्रवाल धर्मशाला नयागंज में चल रही श्री मद्भागवत कथा के दौरान कथा व्यास पंडित हर्षित उपाध्याय ने भगवान कृष्ण और सुदामा की प्रेरक कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भक्ति हमारे आत्मबल को सशक्त करती है और जिस जीवन में भक्ति होती है, वही जीवन धैर्यवान बनता है।
कथा व्यास ने कहा कि भक्त इसलिए प्रसन्न नहीं रहता कि उसके जीवन में विषमताएं नहीं होतीं, बल्कि इसलिए प्रसन्न रहता है क्योंकि उसके भीतर धैर्य होता है। जिस जीवन में प्रभु की भक्ति नहीं होती, उस जीवन में धैर्य का पनपना भी संभव नहीं है। भक्त के जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थितियां आएं, उनसे निपटने के लिए उसके पास अपने इष्ट और आराध्य का नाम तथा अटूट विश्वास का बल होता है।
उन्होंने बताया कि भक्त के जीवन में परिश्रम तो बहुत होता है, लेकिन परिणाम के प्रति कोई आग्रह नहीं होता। भक्त यह जानता है कि उसके हाथ में केवल कर्म है, परिणाम नहीं। विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी यदि कोई हमें प्रसन्नता के साथ जीना सिखाता है, तो वह धैर्य ही है, और यह धैर्य भक्ति से ही आता है। भक्तिमय जीवन की वाटिका में ही प्रसन्नता के पुष्प खिलते हैं।
कृष्ण–सुदामा की कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कथा में मुख्य यजमान संतोष गांधी, पुष्पा, प्रियंक चांडक, कोमल, शिव कुमार, अशोक कुमार, मुकुल, ध्रुव, अंश, मनीष सर्राफ, महेंद्र शर्मा, नरेंद्र, हिर्देश शर्मा आचार्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat