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पिंडोंल में रामकथा के पांचवें दिन भक्तिरस की बौछार, पुष्पवाटिका और धनुष यज्ञ की कथा ने मोह लिया

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बिल्सी (गोविंद देवल):
तहसील क्षेत्र के ग्राम पिंडोंल में चल रही रामकथा के पांचवें दिन शनिवार को भक्तिरस की अविरल धारा बहती रही। वेदव्यास पंडित गौरव देव शर्मा ने अपनी ओजस्वी वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति से पुष्पवाटिका प्रसंग का अत्यंत सुंदर वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि मिथिला की पुष्पवाटिका में गौरी मंदिर के समीप भगवान राम और माता सीता की प्रथम भेंट हुई थी। विवाह से पूर्व माता सीता अपनी सखियों के साथ मनचाहा वर पाने के लिए मां गौरी की पूजा करने आई थीं। उसी समय भगवान राम और लक्ष्मण भी पुष्प लाने वहां पहुंचे। पुष्पवाटिका में जैसे ही दोनों की दृष्टि मिली, वे एक-दूसरे को देखकर मोहित हो गए। यही उनके दिव्य और शाश्वत प्रेम की पावन शुरुआत थी।
व्यास जी ने धनुष यज्ञ की कथा भी अत्यंत रोचक ढंग से सुनाई। उन्होंने बताया कि राजा जनक ने भगवान शिव के शक्तिशाली धनुष पिनाक को उठाकर तोड़ने की शर्त रखी थी। देश-विदेश से आए अनेक राजा इसे उठाने में असफल रहे, लेकिन भगवान राम ने सहज भाव से धनुष को उठाकर तोड़ दिया और इस प्रकार माता सीता से विवाह की शर्त पूरी हुई।
रामकथा के इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे।
संवाददाता: गोविंद देवल


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