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छुट्टा पशु और बंदरों के आतंक के खिलाफ ज्ञापन, मुख्यमंत्री को भेजी मांगें

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बदायूं।
जनहित सत्याग्रह मोर्चा और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी बदायूं के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में जनपद में लगातार बढ़ रहे छुट्टा/बेसहारा पशुओं और बंदरों के उत्पात पर गहरी चिंता जताई गई।
ज्ञापन में बताया गया कि बदायूं जनपद में छुट्टा पशु और बंदर किसानों और आम लोगों के लिए भय का कारण बनते जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले किसान परिवारों पर पशुओं द्वारा हमले किए जा रहे हैं, फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। जब ये पशु सड़कों पर आ जाते हैं तो आए दिन सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं। फसलों की रखवाली के लिए किसानों को जाड़ा, बरसात और गर्मी—हर मौसम में रात-रात भर खेतों में रहना पड़ता है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। शहरी इलाकों में भी छुट्टा पशु दुर्घटनाओं की वजह बन रहे हैं।
ज्ञापन में तहसील दातागंज के गांव गूरा बरेला की घटना का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 25 जनवरी को 60 वर्षीय किसान महिला प्रेमा कश्यप पत्नी स्वर्गीय सुखलाल जंगल में लकड़ी बीनने गई थीं, जहां एक सांड ने उन पर हमला कर दिया। सांड ने उन्हें पटक-पटक कर मार डाला और घंटों तक उनके ऊपर बैठा रहा। ग्रामीणों के शोर मचाने के बावजूद सांड नहीं हटा। पुलिस फोर्स के पहुंचने के बाद काफी मशक्कत से सांड को भगाया जा सका, तब जाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इस घटना के बाद से क्षेत्र में दहशत का माहौल है और किसान समुदाय अपनी सुरक्षा को लेकर भयभीत है।
संगठनों ने मांग की कि छुट्टा पशुओं और बंदरों की समस्या से निपटने के लिए ठोस और प्रभावी इंतजाम किए जाएं। ज्ञापन में प्रमुख रूप से चार मांगें रखी गईं—
सांड के हमले में मृत प्रेमा कश्यप के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।
बदायूं जनपद के समस्त क्षेत्रों से बंदरों और छुट्टा पशुओं को पकड़वाकर उनका समुचित इंतजाम किया जाए।
शहरी इलाकों में कूड़े के ढेरों में पॉलीथिन खाने वाले पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जाए और पॉलीथिन के उत्पादन पर रोक लगाई जाए।
छुट्टा पशुओं के प्रबंधन के लिए आसपास के वनों को संरक्षित कर उनकी बैरिकेडिंग की जाए तथा वनों में पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था की जाए।
ज्ञापन देने वालों में प्रेमपाल सिंह, चरन सिंह यादव, डॉ. सतीश, आर.के. जौहरी, कृष्ण गोपाल, एडवोकेट पवन गौतम, एडवोकेट एस.पी. सिंह, एडवोकेट प्रताप सिंह उर्फ जे.पी. सिंह, एडवोकेट प्रतिपाल सिंह, एडवोकेट मोहर सिंह सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


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