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2017 के बाद यूपी बना पर्यटन का पावरहाउस, घरेलू पर्यटकों में देश में नंबर-1

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बदायूँ।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद पर्यटन क्षेत्र में ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिला है। राज्य सरकार ने पर्यटन को केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तक सीमित न रखते हुए इसे आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का मजबूत आधार बनाया है। दूरदर्शी नीतियों और बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास के चलते उत्तर प्रदेश आज घरेलू पर्यटकों की संख्या के मामले में देश का नंबर-1 राज्य बन चुका है।
पर्यटन विकास की धुरी आध्यात्मिक सर्किट रहा है। अयोध्या धाम में श्रीराम मंदिर निर्माण और दीपोत्सव जैसे भव्य आयोजनों ने अयोध्या को वैश्विक पहचान दिलाई है। वर्ष 2017 में जहां अयोध्या में कुछ लाख पर्यटक आते थे, वहीं अब यह संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है। वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने से श्रद्धालुओं को सुगमता मिली और पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। गंगा आरती और अलकनंदा जैसे क्रूज पर्यटन नए आकर्षण बने हैं।
ब्रज तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से मथुरा, वृंदावन और गोवर्धन के मंदिरों और कुंडों का जीर्णोद्धार कराया गया, जिससे ब्रज क्षेत्र का धार्मिक और सांस्कृतिक वैभव फिर से निखर उठा है।
राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर निवेश को बढ़ावा दिया। नई पर्यटन नीति-2022 के तहत होटल और रिसॉर्ट्स को औद्योगिक दरों पर बिजली-पानी की सुविधा दी गई, जिससे बड़े पैमाने पर निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। कनेक्टिविटी सुधार के तहत कुशीनगर, जेवर (नोएडा) और अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकास किया गया। प्रदेश में क्रियाशील हवाई अड्डों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने पर्यटन को नई गति दी है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे से प्रमुख पर्यटन स्थलों के बीच दूरी और यात्रा समय में भारी कमी आई है।
धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया गया। दुधवा, पीलीभीत और कतर्नियाघाट टाइगर रिजर्व में सुविधाओं का विस्तार किया गया तथा यूपी ईको-टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड का गठन किया गया। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ाने के लिए होमस्टे योजना लागू की गई, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा रोजगार मिला।
प्रयागराज में महाकुंभ-2025 का आयोजन विश्व के सबसे बड़े और सुव्यवस्थित आयोजनों में शामिल रहा। वहीं दीपोत्सव (अयोध्या), रंगोत्सव (बरसाना) और देव दीपावली (वाराणसी) जैसे आयोजनों ने विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित किया।
2017 के बाद उत्तर प्रदेश ने अपनी पहचान केवल ताजमहल तक सीमित न रखते हुए खुद को भारत की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित किया है। पर्यटन विकास ने न सिर्फ प्रदेश की जीडीपी को मजबूती दी है, बल्कि करोड़ों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं।


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