बदायूं। आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय, बदायूं तथा एकेडमिक सोसाइटी फॉर ह्यूमैनिटीज एंड लिटरेरी रिसर्च के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “आईसी-ग्लोबल डायलॉग्स-2026” के दूसरे दिन विभिन्न अकादमिक सत्रों में ज्ञान, शोध और वैश्विक संवाद का व्यापक आदान-प्रदान हुआ। सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, शिक्षकों और शोधार्थियों ने समकालीन विषयों पर अपने विचार साझा किए।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता बरेली कॉलेज की डॉ. वंदना शर्मा ने की, जो भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित रहा। मुख्य व्याख्यान-5 में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कला संकाय की अधिष्ठाता एवं उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की पूर्व अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडेय ने भारतीय ज्ञान परंपरा की ऐतिहासिक समृद्धि और उसकी आधुनिक संदर्भों में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय विचारधारा आज भी वैश्विक बौद्धिक विमर्श को दिशा देने की क्षमता रखती है। वहीं मुख्य व्याख्यान-6 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के दर्शन एवं धर्म विभाग के प्रो. सच्चिदानंद मिश्र, जो भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद (आईसीपीआर) नई दिल्ली के सचिव भी हैं, ने दर्शन, इतिहास और संस्कृति के अंतर्संबंधों पर विस्तार से विचार रखे। इस सत्र में राजनीति विज्ञान विषय से संबंधित 32 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय परिसर, बरेली की डॉ. प्रिया सक्सेना ने की। यह सत्र अंतरराष्ट्रीय साहित्य और समकालीन विमर्श को समर्पित रहा। पोलैंड स्थित जगिलोनियन यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ ओरिएंटल स्टडीज से प्रो. (डॉ.) हलीना मारलेविच ने ऑनलाइन माध्यम से जुड़कर “नाइट ऑफ हैप्पीनेस” विषय के संदर्भ में वैश्विक पहचान और साहित्यिक विमर्श पर व्याख्यान दिया। इस सत्र में साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन से संबंधित 13 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
तृतीय सत्र की अध्यक्षता एनएसयूटी, नई दिल्ली के डॉ. हिमांशु वार्ष्णेय ने की, जिसमें अर्थशास्त्र और वाणिज्य विषय से जुड़े समकालीन आर्थिक परिदृश्यों व नीतिगत चुनौतियों पर 9 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा दो समानांतर सत्रों में शारीरिक शिक्षा विषय की अध्यक्षता प्रो. गौतम सिंह तथा भूगोल विषय की अध्यक्षता प्रो. योगेंद्र सिंह ने की, जिनमें शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।
कॉन्फ्रेंस चेयरमैन डॉ. सतीश सिंह यादव ने कहा कि यह सम्मेलन केवल शोध पत्रों के वाचन का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए विचारों के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम बन रहा है। आयोजन सचिव डॉ. सचिन कुमार ने बताया कि दूसरे दिन 60 से अधिक शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण सम्मेलन की अकादमिक गंभीरता और व्यापक सहभागिता को दर्शाता है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने सभी आमंत्रित वक्ताओं, प्रतिभागियों और शोधार्थियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे शैक्षणिक आयोजनों से ज्ञान और शोध के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है तथा शिक्षकों और शोधार्थियों को वैश्विक स्तर पर संवाद स्थापित करने का अवसर प्राप्त होता है।
Budaun Amarprabhat