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जश्ने छोटे-बड़े सरकार में सूफियाना कलाम और कव्वाली की गूंज, कलाकारों ने बांधा समा

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बदायूं। बीती रात जश्ने छोटे-बड़े सरकार बड़े ही शान-ओ-शौकत के साथ मनाया गया, जिसमें देश के मशहूर और मारूफ शायरों व कव्वालों ने अपने कलाम से महफिल को रूहानी बना दिया। कार्यक्रम में देर रात तक अकीदतमंदों की भीड़ जुटी रही और लोग सूफियाना कलाम व कव्वालियों का आनंद लेते रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत ओवैस सुल्तानी ने कौल से की। उन्होंने पढ़ा— “तन में अली-अली तो जुबां पर अली-अली, मर जाऊं तो कफन पर भी लिखना अली-अली।” इसके बाद देवेंद्र कुमार सिंह ठाकुर ने भी अपने कलाम पेश किए और कहा— “अल्लाह ही जाने कौन बशर है।”
हैदराबाद से आए मशहूर शायर आरिफ सैफी ने अपने शेरों से महफिल में खूब वाहवाही लूटी। उन्होंने पढ़ा—
“घूम है सारे जहां में इसके ही म्यार की,
शान है ऐसी बदायूं वाले इस दरबार की,
हर किसी वास्ते रहमत है और इंसाफ है,
बादशाहत है यहां छोटे-बड़े सरकार की।”
मुंबई से आए नौशाद अली ने भी अपने कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में रामपुर से हाजिरी देने पहुंचे सरफराज राजा कव्वाल ने छोटे-बड़े सरकार की शान में कव्वाली पेश की—
“मैं गदा हूं, मेरे साथ सुल्तान हैं,
मुझसे नाचीज की यही पहचान है।”
पूरे कार्यक्रम के दौरान देर रात तक भीड़ बनी रही। इस मौके पर दरगाह से जुड़े जावेद पीर जी, शहजाद पीर जी, राहिल पीर जी, अजमेरी पीर जी, दानिश पीर जी, मुश्फफे पीर जी, रहबर पीर जी और मोहसिन पीर जी सहित कई लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजनकर्ता मशहूर कव्वाल जुनैद सुल्तानी ने सभी कलाकारों और जायरीनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छोटे-बड़े सरकार की मेहरबानी से आगे भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित होते रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन आमिर सुल्तानी ने किया।


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