बिल्सी (बदायूं)। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित किया गया। सत्संग का संचालन अंतरराष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने किया।
इस दौरान अथर्ववेद के पवित्र मंत्रों के साथ विश्व शांति और राष्ट्र कल्याण के लिए परमेश्वर से प्रार्थना की गई। आचार्य संजीव रूप ने अपने प्रवचन में कहा कि जैसे सड़क कितनी ही साफ क्यों न हो, उस पर धूल आ ही जाती है, उसी प्रकार मनुष्य कितना भी समझदार क्यों न हो उससे भूल होना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य अल्पज्ञ है और गलती करना स्वाभाविक है, लेकिन अपनी गलती को स्वीकार करना और स्वयं को सुधारना ही मनुष्य का श्रेष्ठ आचरण है। जो लोग अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते और दूसरों में ही कमियां खोजते रहते हैं, उनका जीवन व्यर्थ चला जाता है और समाज में उन्हें यश-कीर्ति प्राप्त नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि संसार में कई महान संत हुए जिन्होंने जीवन में गलतियां कीं, लेकिन समय रहते उनसे सीख लेकर स्वयं को सुधारा और महान बने।
सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस अवसर पर श्रीमती अंजली आर्य, श्रीमती कमलेश रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती गुड्डू रानी, विचित्रपाल सिंह, राकेश आर्य, नौबतराम आर्य, पंजाब सिंह तथा आर्य संस्कारशाला के बच्चे मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat