बदायूं। भगवान परशुराम विद्या मंदिर इंटर कॉलेज नेकपुर में चल रहे श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन कथा वाचक सामाजिक संत रवि जी समदर्शी महाराज ने भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का महत्व बताते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का संदेश दिया।
महाराज श्री ने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाना चाहता है तो उसे भगवान श्रीराम के मर्यादित और आदर्श जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। श्रीराम का जीवन सत्य, त्याग, कर्तव्य और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है।
कथा के दौरान उन्होंने नारद जी के अभिमान और भगवान की माया का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब मनुष्य के भीतर अहंकार उत्पन्न हो जाता है तो वह सत्य को पहचानने की क्षमता खो देता है। उन्होंने विश्वमोहिनी स्वयंवर की कथा का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान की माया से स्वयं देवर्षि नारद भी मोहित हो गए थे और जब उनका मोह भंग हुआ तो उन्हें अपने अहंकार का एहसास हुआ। क्रोध और अहंकार में लिया गया निर्णय अंततः मनुष्य को पश्चाताप की ओर ले जाता है।
इसके साथ ही महाराज श्री ने मनु और सतरूपा की कथा का श्रवण कराया। आगे प्रताप भानु की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार कर्मों के प्रभाव से रावण, कुंभकर्ण और अन्य राक्षसों का जन्म हुआ। उन्होंने कहा कि जब अधर्म और अत्याचार बढ़ता है तब पृथ्वी भी पीड़ा से व्याकुल होकर गाय के रूप में भगवान को पुकारती है।
महाराज श्री ने भावपूर्ण स्वर में कहा कि भगवान सदैव दीन-दुखियों के सहारा बनते हैं। जब भी संसार में अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तब भगवान अवतार लेकर धर्म की स्थापना करते हैं।
इस अवसर पर राम बहादुर पांडे, डॉ. विनय द्विवेदी, राहुल पांडे, रामौतार मिश्रा, केके उपाध्याय, अमित पांडे, एनसी मिश्रा, अश्विन भारद्वाज, केएल गुप्ता, वागीश, संजीव पराशर, राहुल चौबे, मोहित प्रभाकर, उत्पल सक्सेना, विजय शंखधार, संजू साहू, अंकुश, लीला पांडे, निवेदिता, कुसुम सक्सेना, प्राचार्य दुर्गेश गुप्ता, राजेश्वर पाठक, उत्पल सक्सेना सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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