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स्वयंसिद्ध माँ शक्ति की महिमा का भावपूर्ण काव्य चित्रण

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— डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’
स्वयंसिद्ध माँ शक्ति। अनासक्ति की भक्ति।।
रूप दिव्यतम, कृत्य अलौकिक,
मर्यादा क्रियाएं लौकिक।
आदर्शों की गाथा मौलिक,
श्रेष्ठ सनातन, उत्तम यौगिक।
नेह भाव अनुरक्ति,
रिद्धि-सिद्धि की शक्ति।।
शब्दों के शुभ परिणामों में,
शुभ उपसर्गों के कामों में।
शक्ति पीठ के गृह धामों में,
शक्ति रूप के नव नामों में।
भक्ति-भाव संपृक्त,
शक्तिदायिनी शक्ति।।
आगम-निगम विचार नियामक,
सृष्टि जीव हित मंगलदायक।
दुष्ट असुर के हित संहारक,
अंधकार में ज्योतित शायक।
भेदभाव हित तिक्त,
शेरावाली शक्ति।।
धर्म-न्याय की ध्वज संधानी,
साधक, आराधक, अज्ञानी।
सुर, नर, मुनि ने कीर्ति बखानी,
कष्ट निवारक माँ कल्याणी।
मातृ भाव से सिक्त,
मोक्षदायिनी शक्ति।।
— डॉ. सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’
मो.: 8394034005


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