बदायूं। गुरुकुल महाविद्यालय सूर्यकुंड में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में एक गरिमामयी सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने गुरु-शिष्य परंपरा और भारतीय संस्कृति को समर्पित कई भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें उपस्थित अतिथियों और शिक्षकों द्वारा खूब सराहा गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक परंपरा के अनुसार हुआ। इसके पश्चात सांस्कृतिक सत्र में ब्रह्मचारी आशीष ने अपनी मधुर वाणी में एक सुंदर भजन प्रस्तुत कर पूरे वातावरण को आध्यात्मिक रस से भर दिया। वहीं, ब्रह्मचारी अभिजीत ने अपनी कलात्मक और भावपूर्ण प्रस्तुति से सभागार में मौजूद सभी लोगों का मन मोह लिया। दोनों छात्रों के प्रदर्शन पर पूरा परिसर करतल ध्वनि से गूंज उठा। इसके साथ ही छात्रा नंदिनी ने शिक्षक दिवस के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने अपने वक्तव्य में बताया कि विद्यार्थी के जीवन को सही दिशा देने में गुरु का मार्गदर्शन कितना अनिवार्य होता है।
इस पावन अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य वेदरत्न आर्य ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गुरु-शिष्य संबंध की गरिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का दिन है। प्रत्येक शिष्य को आज यह दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि वह सदैव अपने गुरुओं के सम्मान की रक्षा करेगा। विद्यार्थियों को जीवन में ऐसा कोई भी आचरण या कार्य नहीं करना चाहिए, जिससे समाज में उनके गुरु को नीचा देखना पड़े। गुरु का मान ही एक सच्चे शिष्य की सबसे बड़ी थाती होती है।
कार्यक्रम के दौरान वेदभानु आर्य, वेदप्रिय आर्य, वेदवीर आर्य, शकुन गुप्ता और अपर्णा सिंघल ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने आधुनिक युग में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और शिक्षकों के प्रति आदर भाव को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया। अंत में सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त करते हुए शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
Budaun Amarprabhat