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प्रदीप रायजादा की स्मृति में सजी काव्य-संध्या: हास्य-व्यंग्य के श्रेष्ठ कवि को साहित्यकारों ने दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

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बदायूं। नगर के प्रख्यात हास्य-व्यंग्य कवि स्वर्गीय प्रदीप विशाल रायजादा की जन्मतिथि के अवसर पर मोहल्ला बजरंग नगर में एक भव्य काव्य-संध्या का आयोजन किया गया। ‘प्रदीप रायजादा स्मृति मंच’ के तत्वावधान में आयोजित इस साहित्यिक गोष्ठी में नगर व क्षेत्र के प्रतिष्ठित कवियों एवं शायरों ने अपनी सशक्त रचनाओं और अश्रुपूरित संस्मरणों के जरिए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में स्व. रायजादा की धर्मपत्नी मीनाक्षी रायजादा और पुत्री रिया रायजादा की विशेष उपस्थिति रही।
काव्य-संध्या की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गीतम सिंह ने की। बतौर मुख्य अतिथि भाजपा नेता मनोज बिट्टन तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा नेता अजय मथुरिया एवं वरिष्ठ कवि विनोद सूर्यवंशी ‘दिल बदायूंनी’ मंचासीन रहे। संचालन युवा कवि एवं गजलकार कुमार आशीष ने किया। शुभारंभ मां सरस्वती व प्रदीप विशाल रायजादा के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्ज्वलन तथा कवि राजवीर सिंह ‘तरंग’ की सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम संयोजक शशांक रायजादा ने सभी अतिथियों और कवियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
काव्य-पाठ के क्रम में कवियों ने विविध भावों के रंग बिखेरे। अध्यक्षता कर रहे डॉ. गीतम सिंह ने प्रेम और स्मृतियों को वाणी देते हुए पढ़ा—
“आओ प्रिया बनाओ मौसम, आकर खुशियां मिलें गले।
केवल इतना याद करो तुम, पहले-पहले कहां मिले।”
वरिष्ठ उस्ताद शायर सुरेन्द्र ‘नाज’ ने सामाजिक यथार्थ पर प्रहार करते हुए पढ़ा—
“थी अबकी जंग अपनों से हमारी, कहां तक हौसले लड़ते हमारे।”
वहीं शायर जनाब अहमद अमजदी ने सुनाया—
“जिंदगी भर न करीं जिसने वफाएं मुझसे, आ गए हैं वो मेरे, देखिए मर जाने पर।”
संचालक कुमार आशीष ने अपनी गजल से खूब वाहवाही लूटी—
“जिसमें कोई भी जिक्र तुम्हारा नहीं लगता, होठों को मेरे गीत वो प्यारा नहीं लगता।”
वरिष्ठ कवि विनोद सूर्यवंशी ‘दिल बदायूंनी’ ने आत्मविश्वास का संचार करते हुए कहा—
“फूल पत्थर में खिला दें, वो जिगर रखते हैं।”
विनोद सक्सेना ‘बिन्नी’ ने पढ़ा—
“मेरे ऐबो-हुनर चुनकर मेरी औलाद रखेगी, भला ये बेवफा दुनिया मुझे क्यों याद रखेगी।”
हिंदी दिवस की पूर्व संध्या के उपलक्ष्य में पवन शंखधार और षट्वदन शंखधार ने हिंदी के गौरव, कबीर, सूर और तुलसी की परंपरा को समर्पित प्रभावी मुक्तक प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रप्रेम और भाषा-गौरव से भर दिया। इसके अलावा अजीत रस्तोगी ‘सुभाषित’ ने जीवन के संघर्षों तथा राजवीर सिंह ‘तरंग’ ने मानवीय संवेदनाओं पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं की तालियां बटोरीं।
उपस्थित श्रोताओं ने प्रत्येक रचना पर खुले मन से दाद दी और देर रात तक काव्य रसधारा का आनंद लिया। इस मौके पर मुकुल चतुर्वेदी, अमित राठौर, विनोद सोमवंशी, उदय सोमवंशी, मनोज शंखधार, उपासना शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।


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