Breaking News

गणपति की आराधना से आती है घर में सुख-शांति और समृद्धि

Spread the love

आज मनेगा विघ्नहर्ता का जन्मोत्सव
उझानी। बुद्धि, विवेक और ज्ञान के प्रदाता भगवान श्री गणेश का पावन जन्मोत्सव (गणेश चतुर्थी) नगर व ग्रामीण अंचलों में पूरे हर्षोल्लास और श्रद्धा-भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। विघ्नहर्ता के स्वागत के लिए जगह-जगह भव्य पंडाल सजाए गए हैं। श्रद्धालु अपने आराध्य गजानन की प्रतिमा को वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विराजमान कर छह से सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव का विधिवत शुभारंभ कर रहे हैं। अनन्त चतुर्दशी पर गंगा में प्रतिमा विसर्जन और लोक कल्याण की कामना के साथ पर्व का समापन होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को माता पार्वती ने अपने उबटन से श्री गणेश की रचना की थी, इसलिए इस पावन दिन को उनके प्राकट्योत्सव के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक आख्यानों में उल्लेख है कि जब महादेव को द्वार पर रोकने के कारण उन्होंने बालक गणेश का शीश काट दिया था, तब माता पार्वती के विलाप को शांत करने के लिए गज शिशु का शीश जोड़कर उन्हें पुनर्जीवन दिया गया। बाद में अपने माता-पिता की परिक्रमा कर उनकी सेवा करने के फलस्वरूप उन्हें देवताओं में प्रथम पूज्य का अलौकिक वरदान मिला। मान्यता है कि गणपति की निष्ठापूर्वक उपासना से जीवन के समस्त विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
इस पावन पर्व का सामाजिक और ऐतिहासिक महत्व भी अद्वितीय है। सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने गणेशोत्सव को सांस्कृतिक पर्व के रूप में संरक्षण प्रदान किया था। आगे चलकर स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महान क्रांतिकारी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने वर्ष 1893 में महाराष्ट्र से इसे वृहद सार्वजनिक आंदोलन का रूप दिया, जिसका उद्देश्य देशवासियों को एक मंच पर लाकर उनमें देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता का संचार करना था। आज भी यह पर्व सामाजिक सौहार्द और सामूहिक आस्था का प्रतीक बना हुआ है।


Spread the love

About Govind Deval

Check Also

महिला-बालिका सुरक्षा और नशे के खिलाफ जागरूकता शिविर आयोजित

Spread the loveसाइबर सुरक्षा, बाल विवाह और सरकारी योजनाओं की दी जानकारी बदायूं। महिला एवं …