भागवत कथा का श्रवण करने से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश हो जाता है
बिल्सी में भागवत कथा का आठवां दिन
बिल्सी। कछला रोड स्थित ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में सिद्धपीठ श्री बालाजी धाम की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के आठवें दिन बृहस्पतिवार को कथावाचक रामचन्दाचार्य ने कथा के माध्यम से सत्य मार्ग पर चलने व ईश्वर की भक्ति के बारे में जानकारी दी। उन्होनें कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य को भक्ति के लिए ज्ञान की प्राप्ति होती है। उसी के आधार पर उसे मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा वह अमृत है, जिसके पान से भय, भूख, रोग व संताप सब कुछ स्वत: ही नष्ट हो जाता है। श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करने से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश हो जाता है। कथावाचक ने बताया कि धुंधुकारी अति दुष्ट था। उसके पिता आत्मदेव भी उसके उत्पातों से दुखी होकर वन में चले गए थे। धुंधुकारी वेश्याओं के साथ रहकर भोगों में डूब गया और एक दिन उन्हीं के द्वारा मार डाला गया। अपने कुकर्मों के फलस्वरूप वह प्रेत बन गया और भूख प्यास से व्याकुल रहने लगा। एक दिन व्याकुल धुंधुकारी अपने भाई गोकर्ण के पास पहुंचा और संकेत रूप में अपनी व्यथा सुनाकर उससे सहायता की याचना की। इसलिए धुंधुकारी की मुक्ति के लिए गया श्राद्ध पहले ही कर चुके थे। लेकिन इस समय प्रेत रूप में धुंधुकारी को पाकर गया श्राद्ध की निष्फलता देख उन्होंने पुन: विचार विमर्श किया। अंत में स्वयं सूर्य नारायण ने गोकर्ण को निर्देश दिया कि श्रीमद्भागवत का पारायण कीजिए। उसका श्रवण मनन करने से ही मुक्ति होगी। श्रीमद् भागवत का पारायण हुआ। गोकर्ण वक्ता बने और धुंधुकारी ने वायु रूप होने के कारण एक सात गांठों वाले बांस के भीतर बैठकर कथा का श्रवण मनन किया। सात दिनों में एक-एक करके बांस की सातों गांठे फट गईं। धुंधुकारी भागवत के श्रवण मनन से सात दिनों में सात गांठे फोड़कर, पवित्र होकर, प्रेत योनि से मुक्त होकर भगवान के वैकुंठ धाम में चला गया। इस मौके पर महंत मटरुमल शर्मा महाराज, दीपक माहेश्वरी, सौरभ सोमानी, जितेंद्र कुमार, गोरेलाल शर्मा, आशीष वाष्र्णेय, सुवीन माहेश्वरी, अनीता माहेश्वरी, सुभाष चन्द्र बाहेती, शरद माहेश्वरी, रंजन माहेश्वरी, विशाल भारत खासट, डा.राजाबाबू वाष्र्णेय, अनूप माहेश्वरी, निशांत, नीरज, सरिता, मोहित देवल आदि मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat