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दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को ही: ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा

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दीपावली पर्व 20 अक्टूबर को ही: ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा

निर्णय का तत्व आधार

प्रामाणिक ग्रंथों में तो स्पष्ट कहा है कि यदि दिन में चतुर्दशी हो और रात में अमावस्या हो तो तब लक्ष्मी पूजन करें। यही सुखरात्रि कही गई है —
अमावस्या यदा रात्रौ
दिवाभागे चतुर्दशी ।
पूजनीया तदा लक्ष्मीर्विज्ञेया सुखरात्रिका ।।
कामाख्या तंत्र में लिखा है कि अमावस्या की अर्धरात्रि में ही देवी पूजा करनी चाहिए —
अत्रैव निशीथे श्यामापूजामाह कामाख्यातन्त्रे-
शरत्काले च देवेशि !
दीपयात्रादिने तथा ।
अमावास्यां समासाध्य
मध्यरात्रौ विचक्षणः ।।
मृण्मयी पुत्तलीं कृत्वा दीपादिभिरलङ्कृताम्।
बलिं नानाविधं दद्यात् वाद्यभाण्डसमन्वितम् ।।
नृत्यं गीतं कौतुकानि
यावत्सूर्योदयं चरेत् ।
प्रातःकाले शुद्धतोये स्थापयेदविनाशिनीम् ।।
अत्र मध्यरात्रिश्रवणान्निशीथव्यापिनी श्यामापूजायां ग्राह्या ।
भविष्य पुराण में वर्णित है कि कार्तिक अमावस्या की अर्धरात्रि में ही भगवती काली की पूजा करनी चाहिए —
भविष्येऽपि-
प्रतिसंवत्सरं कुर्यात्कालिकायां महोत्सवम् ।
कार्त्तिके तु विशेषेण अमावास्या निशार्द्धके । तस्यां सम्पूजयेद्देवीं भोगमोक्षप्रदायिनीम् ।।
यदि दोनों दिनों में अर्धरात्रि में अमावस्या हो तो चतुर्दशी युक्त ही ग्रहणा करें, ऐसा आगम तंत्र ग्रंथों में कहा है —
यदोभयदिने तदा चतुर्दशीयुता ग्राह्या-
अर्द्धरात्रे महेशानि अमावास्या यदा भवेत् । चतुर्दशीयुताग्राह्या चामुण्डा पूजने सदा ।। इत्यागमात् ।
तथा- यत्रोभयदिने भूतयुक्तकुह्वां महानिशि । इमां यात्रां कारयित्वा चक्रवर्ती नृपो भवेत् ।।

दीपावली अर्थात् घी के दीपों की मालिका तो भगवती को चतुर्दशी और अमावस्या दोनों ही तिथियों में अर्पित करने का आदेश है —
अथ दीपमालिकादानफलमाह-
‘यः कुर्यात्कार्तिके मासे शोभनां दीपमालिकाम् ।
घृतेन च चतुर्दश्याममायां च यावद्दीपप्रसंख्या तु घृतेनापूर्य बोधिता ।तावद्युगसहस्राणि स्वर्गलोके विशेषतः महीयते ।।

फिर भी यदि किसी को न मानना है तो न मानें।
वैसे भी आगमशास्त्र के साधक तो पंचांग से आगे अष्टांग के आधार पर संकल्प बोलकर अपनी साधना शुरू करते हैं। अब जिन्होंने आज तक पंचांग के भी गुरु अष्टांग का नाम भी नहीं सुना तो यह उनकी बुद्धि का दोष है। जिसको जो रूचिकर लगे वैसा करें।
और सही तो रहेगा कि अपने गुरु के आदेशानुसार करें। शास्त्र भी यही कहता है कि —
मतानां मिश्रिते तु कुर्याद् गुरुसम्मतम्!!

अतः दीपावली 20 अक्टूबर को प्रदोषकाल और पूर्ण रात्रिकाल में अमावस्या रहने के कारण 20 अक्टूबर को ही समस्त संध्याकाल , प्रदोषकाल से सम्पूर्ण रात्रिकाल में लक्ष्मी-पूजन , उपासना, साधना उचित है। इसी का निर्णय काशी विद्भत परिषद ने लिया है अतः 20 अक्टूबर को ही दीपावली सर्वमान्य होगी।

राजेश कुमार शर्मा
ज्योतिषाचार्य


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