लखनऊ -,
हर वर्ष 20 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय चंद्र दिवस (इंटरनेशनल मून डे) मनाया जाता है। यह दिन 20 जुलाई 1969 को अपोलो-11 मिशन के तहत मानव के पहली बार चंद्रमा पर कदम रखने की ऐतिहासिक उपलब्धि की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर खगोलविद अमर पाल सिंह ने चंद्रमा के वैज्ञानिक, ऐतिहासिक और भविष्य से जुड़े महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2021 में 20 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय चंद्र दिवस घोषित किया था। इसका उद्देश्य चंद्रमा के वैज्ञानिक अध्ययन, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 20 जुलाई 1969 को नासा के अपोलो-11 मिशन के तहत नील आर्मस्ट्रांग चंद्रमा पर कदम रखने वाले पहले मानव बने, जबकि कुछ समय बाद बज़ एल्ड्रिन भी चंद्र सतह पर पहुंचे। वहीं माइकल कॉलिन्स कमांड मॉड्यूल में चंद्रमा की कक्षा में रहे। इस मिशन ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई दिशा दी।
उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा पर लगभग 21 घंटे बिताए, कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और लगभग 21.5 किलोग्राम चंद्रमा की मिट्टी एवं चट्टानों के नमूने पृथ्वी पर लाए, जिनसे चंद्रमा की संरचना और उत्पत्ति को समझने में वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
भारत की उपलब्धियां भी रहीं उल्लेखनीय
अमर पाल सिंह ने कहा कि भारत ने भी चंद्र अन्वेषण में विश्व स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। चंद्रयान-1 ने चंद्रमा पर जल-अणुओं के प्रमाण दिए, चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अब भी अध्ययन कर रहा है और 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर भारत को यह उपलब्धि हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बना दिया।
भविष्य का आधार बनेगा चंद्रमा
उन्होंने बताया कि भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी अनुसंधान केंद्र, लूनर गेटवे अंतरिक्ष स्टेशन और मंगल मिशनों की तैयारी के लिए इसे आधार बनाया जा सकता है। चंद्र ध्रुवों पर मौजूद जल-बर्फ और हीलियम-3 जैसे संसाधनों पर भी वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं।
चंद्रमा से जुड़े रोचक तथ्य
खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। यह पृथ्वी से औसतन 3,84,400 किलोमीटर दूर है और इसका गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी का लगभग एक-छठा है। अब तक केवल 12 अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर चल चुके हैं और सभी अपोलो मिशनों के दौरान पहुंचे थे।
ऐसे मनाएं अंतर्राष्ट्रीय चंद्र दिवस
उन्होंने लोगों से अपील की कि इस अवसर पर दूरबीन से चंद्रमा का अवलोकन करें, विद्यालयों में अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी कार्यक्रम आयोजित करें, बच्चों को अपोलो मिशन और चंद्रयान की प्रेरक कहानियां सुनाएं तथा विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़ी पुस्तकों का अध्ययन कर नई पीढ़ी में वैज्ञानिक सोच विकसित करें।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय चंद्र दिवस केवल एक ऐतिहासिक उपलब्धि का स्मरण नहीं, बल्कि मानव जिज्ञासा, वैज्ञानिक सोच और वैश्विक सहयोग का उत्सव है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि चंद्रमा तक पहुंचना मंजिल नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में नई खोजों और नई संभावनाओं की शुरुआत है।
Budaun Amarprabhat