बदायूँ। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर जन दृष्टि (व्यवस्था सुधार मिशन) के तत्वावधान में एक ऑनलाइन विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का उद्देश्य मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के लोक उपयोगी प्रावधानों को कठोरता से लागू कर मानवाधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
इस अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए हरि प्रताप सिंह राठोड़, अध्यक्ष एवं संस्थापक ने कहा कि अधिनियम में नागरिकों के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की सुरक्षा की गारंटी दी गई है। उन्होंने बताया कि अधिनियम की धारा 3 के तहत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और धारा 21 के तहत राज्य मानवाधिकार आयोग का गठन आवश्यक है। जबकि राष्ट्रीय आयोग सक्रिय है, अधिकांश राज्य आयोग निष्क्रिय हैं।
उन्होंने अधिनियम की धारा 13 और 14 का हवाला देते हुए कहा कि आयोग को शिकायतों की जांच और विवेचना कराने का अधिकार है। इसके बावजूद मानवाधिकार न्यायालयों का गठन (धारा 30) होने के बावजूद ये न्यायालय क्रियाशील नहीं हैं और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति भी नहीं हुई है।
श्री राठोड़ ने जोर देकर कहा कि अधिनियम के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि राज्य मानवाधिकार आयोग सक्रिय किए जाएं, मानवाधिकार न्यायालयों को चालू किया जाए, और धारा 37 के अंतर्गत विशेष जांच दल गठित कर मानवाधिकार उल्लंघन मामलों की विवेचना और अभियोजन सुनिश्चित किया जाए।
इस ऑनलाइन गोष्ठी में मार्गदर्शक धनपाल सिंह, संरक्षक एम.एल. गुप्ता, सुरेश पाल सिंह, केंद्रीय कार्यालय प्रभारी राम गोपाल, सह केंद्रीय कार्यालय प्रभारी अखिलेश सिंह, प्रदेश समन्वयक सतेन्द्र सिंह गहलोत, मंडल समन्वयक एम.एच. कादरी, जिला समन्वयक आर्येन्द्र पाल सिंह, सह जिला समन्वयक राम लखन, तहसील समन्वयक नेत्रपाल एवं प्रमोद कुमार सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
गोष्ठी में यह स्पष्ट किया गया कि मानवाधिकार अधिनियम केवल कागजों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी लागू होना चाहिए, ताकि प्रत्येक नागरिक अपने अधिकारों का संरक्षण पा सके।
Budaun Amarprabhat