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श्रीमद्भागवत कथा में निष्काम भक्ति का संदेश, देर रात तक झूमते रहे श्रद्धालु

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संवाददाता गोविन्द देवल
बदायूँ। मोहल्ला कृष्णापुरी स्थित श्री जी रिसार्ट में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दौरान कथा व्यास आचार्य गोपारण शरण जी महाराज ने निष्काम भक्ति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा की कृपा प्राप्त करने के लिए हृदय में निष्काम भक्ति का वास होना आवश्यक है। भक्ति के साथ ज्ञान और वैराग्य का होना भी जरूरी है, क्योंकि ज्ञान और वैराग्य के बिना भक्ति अधूरी रहती है।
कथा व्यास ने कहा कि वृंदावन भक्ति का निवास स्थल है, इसलिए वहां भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है। उन्होंने समझाया कि भक्ति की प्राप्ति के लिए जीवन में सत्संग अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि सत्संग के बिना विवेक की उत्पत्ति नहीं होती। सत्संग भी ऐसे संतों के साथ करना चाहिए, जिनका हृदय दयावान हो, कार्य परोपकारी हों और जिनके चिंतन में भगवद्भक्ति की माला सजी हो।
देर रात तक चली कथा में आचार्य गोपारण शरण जी महाराज ने राजा परीक्षित के जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन किया। वाद्ययंत्रों की संगीतमयी धुनों पर जहां बड़े-बड़े भक्त भावविभोर होकर झूमते नजर आए, वहीं छोटे-छोटे बच्चे भी भक्ति रस में डूबे दिखाई दिए।
कथा का संचालन वरिष्ठ कवि कामेश पाठक ने किया। पूजन की जिम्मेदारी उमेश शास्त्री ने निभाई। मुख्य परीक्षित रामवीर शर्मा सप्तनीक रहे। प्रसाद वितरण का कार्य प्रवेश शर्मा ने किया। आयोजन को सफल बनाने में समिति के सभी पदाधिकारियों का विशेष सहयोग रहा।


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