रमजान में इबादत के साथ रोजा, मस्जिदों में गूंज रही तरावीह की नमाज
संवाददाता – गोविंद देवल, बदायूं
बदायूं। इस्लाम धर्म का पवित्र माह रमजान इन दिनों पूरे जोश और अकीदत के साथ मनाया जा रहा है। रोजेदार इबादत के साथ रोजा रखकर अल्लाह की बारगाह में दुआएं मांग रहे हैं। रमजान को तीन अशरों में बांटा गया है, जिनमें हर अशरे का अलग महत्व है। पहला अशरा ‘रहमत’ का था, जिसका समापन शनिवार को इफ्तार के साथ हो गया। रविवार से दूसरे अशरे ‘मगफिरत’ की शुरुआत हो गई है।
रमजान माह को कुरआन के नाजिल होने का महीना माना जाता है। इसी माह में मुसलमानों पर रोजा फर्ज किया गया। पूरे महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है—पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा बरकत व जहन्नुम की आग से निजात का अशरा। हर अशरा दस दिनों का होता है। हालांकि चांद की स्थिति के अनुसार अंतिम अशरा कभी-कभी नौ दिनों का भी रह जाता है। इस्लामिक कैलेंडर चांद पर आधारित है। यदि ईद का चांद 29वें दिन दिखाई दे जाए तो रमजान 29 दिन का ही होता है, जिससे तीसरा अशरा नौ दिन का हो जाता है।
रोजेदार तड़के सहरी करने के बाद सूर्योदय से पहले रोजा शुरू करते हैं और सूर्यास्त तक बिना कुछ खाए-पीए अल्लाह की इबादत में मशगूल रहते हैं। शाम को
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