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सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन की मांग को लेकर शिक्षकों ने उठाई आवाज

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अनुदानित महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजने की बनाई रणनीति

कछला। उत्तर प्रदेश के 331 अनुदानित महाविद्यालयों में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत शिक्षकों ने सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और सम्मानजनक मानदेय समेत विभिन्न मांगों को लेकर शासन का ध्यान आकर्षित करने की पहल की है। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से शिक्षण कार्य करने के बावजूद उनकी सेवाओं की स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विषयों का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

शिक्षकों के अनुसार प्रदेश के इन महाविद्यालयों में करीब तीन हजार असिस्टेंट प्रोफेसर स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत हैं। अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाने के लिए जिलाधिकारियों और उपजिलाधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे जा रहे हैं। शिक्षक संघ की ओर से भी मांगों को शासन के समक्ष रखा जा रहा है।

इसी क्रम में गोविंद बल्लभ पंत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कछला के स्ववित्तपोषित शिक्षकों ने भी अपनी समस्याओं को लेकर अपना पक्ष रखा। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से विद्यार्थियों को शिक्षित करने का कार्य कर रहे हैं और सेवा सुरक्षा एवं सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था से उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना का विरोध उनका उद्देश्य नहीं है। उनके अनुसार योजना से संबंधित अपना पक्ष रखते हुए वे अपनी लंबित मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। शिक्षकों ने स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए उचित एवं स्थायी नीति बनाए जाने की मांग की।

इस अवसर पर डॉ. ओमश्री मिश्रा, श्रीमती नीरू शर्मा, श्रीमती सारिका सक्सेना, डॉ. सीमा सक्सेना और डॉ. उपासना वशिष्ठ सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे। शिक्षकों ने कहा कि विद्यार्थियों के हित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कायम रहेगी तथा मांगों के समाधान के लिए लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से प्रयास जारी रखे जाएंगे।


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