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गुरु नानक जयंती और कार्तिक पूर्णिमा पर्व गुधनी में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया

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बिल्सी : गुरु नानक जयंती और कार्तिक पूर्णिमा पर्व गुधनी में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया

बिल्सी (संवाददाता)।
तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी में स्थित आर्य समाज मंदिर में गुरुनानक जयंती एवं कार्तिक पूर्णिमा पर्व बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्वामी वेदानंद ने यज्ञ कराया, जबकि श्रीमती शशि आर्य यजमान बनीं।

सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने कहा कि गुरु नानक जी ने समाज के कल्याण के लिए महान कार्य किए। उन्होंने बताया कि जब मुगलों ने उन्हें “हिंदू काफिर” कहा तो उन्होंने स्वयं को “खालिस” अर्थात श्रेष्ठ ईश्वर पुत्र बताया और खालसा पंथ की स्थापना की। गुरु नानक ने समाज में ऊँच-नीच, छुआछूत और भेदभाव को बुरा माना और सभी को सच्चाई तथा मेहनत का मार्ग दिखाया। आचार्य संजीव रूप ने विशेष रूप से कहा कि गुरु नानक ने “बॉटकर खाने की शिक्षा” दी, जो मेहनत, ईमानदारी और साधुता का प्रतीक है।

इस अवसर पर स्वामी वेदानंद ने कहा कि व्यक्ति कठोर परिश्रम और ईमानदारी के व्यवहार द्वारा ही पूर्णता और यश प्राप्त कर सकता है, जैसे चंद्रमा अपने प्रकाश से सबको आलोकित करता है। श्रीमती शशि आर्य ने कहा कि स्नान केवल शरीर के लिए नहीं, बल्कि मन की शुद्धि के लिए भी होना चाहिए, क्योंकि मन हमारे बंधन और मुक्ति का मुख्य कारण है।

इस मौके पर श्रीमती अरुणा कुमारी, रक्षा आर्य, संतोष कुमारी, पदमा रानी, मधुबाला, नेहा आर्य सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।


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