संवाददाता — आई.एम. खान, बदायूं
बदायूं। नवंबर माह की शुरुआत के साथ ही जहाँ एक ओर भारत सरकार ने वक़्फ़ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन के लिए उम्मीद पोर्टल पर प्रक्रिया शुरू कराई, वहीं दूसरी ओर निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) लागू होने से मतदाता सूची के सुधार और सत्यापन का कार्य तेज़ हो गया है। इन दोनों महत्त्वपूर्ण अभियानों के बीच बदायूं के वरिष्ठ नेता फ़ख़रे अहमद शोबी एक नायक के रूप में उभरकर सामने आए हैं।
जैसे ही दोनों अभियान प्रारम्भ हुए, शोबी बिना किसी सरकारी सहायता के लोगों की मदद के लिए मैदान में उतर पड़े। वक़्फ़ संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन में उन्होंने अद्वितीय पहल करते हुए बदायूं शहर ही नहीं बल्कि सहसवान, बिल्सी, ककराला और सैदपुर में भी रजिस्ट्रेशन केंद्र खुलवाए।
इन केंद्रों पर वक़्फ़ से जुड़े मस्जिद, ईदगाह, कब्रिस्तान आदि की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क कराई जा रही है। शोबी ने आवश्यक दस्तावेजों को एकत्र कर प्रत्येक केंद्र पर उपलब्ध कराया ताकि लोगों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
आज जिले में वक़्फ़ संपत्ति रजिस्ट्रेशन का कार्य तेज़ी से और व्यवस्थित तरीके से चल रहा है। शोबी प्रतिदिन सुबह अपने कैंप कार्यालय में बैठकर आम लोगों की समस्याएँ सुनते हैं और सम्बंधित मुद्दों को प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखते हैं।
एसआईआर अभियान में भी सक्रिय भूमिका
फ़ख़रे अहमद शोबी ने पार्टी की ओर से बनाए जा रहे बीएलए-2 की प्रक्रिया में सक्रिय हिस्सा लेते हुए कई क्षेत्रों में सहयोग प्रदान किया। इसके साथ ही मतदाता सूची में होने वाली गड़बड़ियों, सुधार और पुनरीक्षण से जुड़े मामलों को भी वे लगातार अधिकारियों के समक्ष उठाते रहे हैं।
लोगों की सुविधा के लिए उन्होंने सन् 2003 की बदायूं विधानसभा की पूरी मतदाता सूची अपने कार्यालय पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध करा दी है, ताकि कोई भी नागरिक पुराने रिकॉर्ड देखकर अपनी जानकारी सत्यापित कर सके।
लोगों के बीच लोकप्रियता और भरोसे की वजह यही है कि शोबी आम जनता की समस्या को तुरंत समझते हैं और समय-समय पर प्रशासन को अवगत कराते हुए समाधान के लिए प्रयासरत रहते हैं। बदायूं में इन दिनों वक़्फ़ रजिस्ट्रेशन और एसआईआर दोनों अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा का विषय बनी हुई है।
Budaun Amarprabhat