
बदायूं/ककराला।
कस्बा ककराला इन दिनों रूहानी माहौल में सराबोर है। विश्वविख्यात सूफी बुज़ुर्ग हज़रत शाह शुजाअत अली मियाँ रहमतुल्लाह अलैह का दो दिवसीय सालाना उर्स 28 व 29 मार्च 2026 को अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा। उर्स को लेकर गली-गली सजावट, रोशनी और खुशबुओं से फिज़ाएं महक उठी हैं।
उर्स का आगाज़ 28 मार्च की सुबह कुरआन ख्वानी और फातिहाख्वानी से होगा, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल होंगे। दोपहर में नमाज़-ए-जुहर के बाद जुलूस-ए-परचम कुशाई की परंपरा अदा की जाएगी, जो तयशुदा रास्तों से गुजरते हुए दरगाह शरीफ पहुंचकर सम्पन्न होगी। इस जुलूस में दूर-दराज से आए जायरीन की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।
रात को नमाज़-ए-इशा के बाद दरगाह शरीफ में महफिल-ए-मीलाद और तकरीरी कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें देशभर से आए उलेमा-ए-किराम इंसानियत, अमन-ओ-भाईचारा और समाज सुधार जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे।
दरगाह शरीफ के सज्जादानशीन हज़रत शाह गाज़ी मियाँ की सरपरस्ती में सभी कार्यक्रम आयोजित होंगे। उर्स के दौरान दो दिनों तक जायरीन के लिए लंगर की विशेष व्यवस्था रहेगी, जहां हजारों लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करेंगे।
उर्स में शिरकत के लिए देश के कोने-कोने से मुरीदीन की आमद तेज हो गई है। मजार-ए-पाक पर सुबह से देर रात तक जायरीन की भीड़ उमड़ रही है और अकीदतमंद हाजिरी देकर दुआएं मांग रहे हैं।
उर्स इंतिजामिया कमेटी ने सभी जायरीन से अपील की है कि वे इस रूहानी आयोजन में शामिल होकर व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। वहीं सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल और रोशनी की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, जिससे उर्स का आयोजन भव्य और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
Budaun Amarprabhat