बिसौली। नगर के प्रसिद्ध संत सूफी शरीफ़ सरमद का दो दिवसीय सालाना उर्स के मौके पर तरही मुशायरे का आयोजन किया गया। इस दौरान आस्था के साथ-साथ अदब, इल्म और सूफी परंपरा का संगम बना।
उर्स की शुरुआत नमाज ए फज्र के बाद कुरानख्वानी से हुई। इसी रात एक नातिया मुशायरे का आयोजन हुआ। इस आयोजन की सरपरस्ती सज्जादानशीन सूफी ज़रीफ़ साहब ने की। मुशायरे का आगाज अभीक्ष पाठक आहत ने अपने कलाम से किया। उन्होंने पढ़ा, जहाँ भी चाहें सजा लें वो अपनी फील्डिंग को, हमारी टीम के कप्तान सूफी सरमद हैं। मशहूद खां हमदम ने अपना कलाम पेश किया। उन्होंने कहा अगर बवाल मचाया, रिपोर्ट कर दूँगा, अदब के थाने के दीवान सूफी सरमद हैं। श्रीदत्त शर्मा मुजतर ने अपना कलाम पेश किया अगर कलाम कहो, नाप तौल कर कहना, इसी अदा पे तो कुर्बान सूफी सरमद हैं। मशकूर अहमद नज़्मी ने कुछ यूं कहा हम से है इतनी मोहब्वत कि यकी़ं है नजमी, आज भी बज़्म में मेहमान हैं सूफ़ी सरमद। अमीरुद्दीन अमीर ने कुछ यूं बयां किया अमीर तूने भला सोच भी लिया कैसे, कि तेरे हाल से अंजान हैं सूफ़ी सरमद। माजिद सलमानी ने कहा माल ए दुनिया न सही उक़बा की दौलत ही सही निर्धनी हो के भी धनवान हैं सूफ़ी सरमद। फरीद इदरीसी ने कहा नबी की आल से और उनके जां निसारो से सुना है आपकी पहचान हैं सूफी सरमद। फईम अहमद ने कहा मुद्दतों जिसने ज़माने की मेजबानी की, करबला अब तेरे मेहमान हैं सूफी सरमद। मुशायरे में सभी शायरों को बैज लगाकर सम्मानित किया गया।
Budaun Amarprabhat