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देहदान का संकल्प लेकर नीलिमा पाठक बनीं प्रेरणा, एसआरएमएस इंस्टीट्यूट में विशेष सम्मान समारोह आयोजित

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संवाददाता आई एम खान
बिसौली। परोपकार की भावना को सर्वोपरि मानते हुए बिसौली की निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता नीलिमा पाठक ने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लेकर एक नई मिसाल पेश की है। श्री राममूर्ति स्मारक (एसआरएमएस) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा आयोजित “देह से दिव्यता तक” विषयक सम्मान समारोह में उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि एवं संस्थान के संस्थापक-चेयरमैन श्री देवमूर्ति ने नीलिमा पाठक को शाल ओढ़ाकर, स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। इसके साथ ही उन्हें जीवन के प्रतीक स्वरूप एक पौधा भेंट कर इस महान निर्णय की सराहना की गई।
राष्ट्रीय ब्राह्मण सेवा संस्थान व ‘उड़ान – एक प्रयास’ की अध्यक्ष नीलिमा पाठक ने अपने संबोधन में कहा, “मेरी हार्दिक इच्छा है कि मेरे न रहने पर भी मेरी आंखें किसी जरूरतमंद के काम आएं और मेरा शरीर मेडिकल छात्रों के अध्ययन हेतु समर्पित रहे।” उन्होंने कहा कि परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं है और देहदान जैसे पावन कार्य में सभी को आगे आना चाहिए। उन्होंने अपने जीवन के उद्देश्य को “जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी” के मंत्र के साथ परिभाषित किया।
इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में एच.ओ.डी. (एनाटॉमी) डॉ. नमिता मेहरोत्रा, डॉ. एयर मार्शल एम.एस. वाटला और लखनऊ से आईं एमएलसी डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी मुख्य रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में मेडिकल कॉलेज के विभिन्न विभागों के चिकित्सक और बड़ी संख्या में भावी डॉक्टर (छात्र-छात्राएं) मौजूद थे, जिन्होंने नीलिमा पाठक के इस निस्वार्थ संकल्प का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।
इस सम्मान ने न केवल नीलिमा पाठक के सामाजिक योगदान को रेखांकित किया, बल्कि समाज को मृत्यु के बाद भी जीवन देने की प्रेरणा प्रदान की है।


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