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जिला कारागार में सुरक्षित बचपन की समीक्षा, माताओं के साथ रह रहे बच्चों की सुविधाओं पर दिया गया जोर

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संवाददाता गोविन्द देवल
बदायूं। जिला कारागार में संयुक्त निगरानी समिति ने शुक्रवार को निरीक्षण कर ‘सुरक्षित बचपन’ अभियान के तहत माताओं के साथ रह रहे बच्चों की स्थिति और उन्हें मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा की। समिति ने बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।

निरीक्षण के दौरान समिति ने पाया कि वर्तमान में पांच बच्चे अपनी माताओं के साथ जिला कारागार में रह रहे हैं। इन बच्चों की व्यक्तिगत देखभाल योजना (आईसीपी) का नियमित फॉलोअप करने तथा समय-समय पर काउंसलिंग कराने के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारी को निर्देशित किया गया।

समिति ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, एसीएमओ और बाल रोग विशेषज्ञ को बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, शिक्षा एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) अरुण कुमार ने कारागार में निरुद्ध महिला बंदियों के परिवारों में रह रहे बच्चों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए संबंधित उपजिलाधिकारियों के समन्वय से आवश्यक दस्तावेज तैयार कराने और पात्र बच्चों को योजनाओं से जोड़ने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी अभय कुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मोहन झा, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष नन्द किशोर पाठक, संरक्षण अधिकारी रवि कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता भमरपाल सिंह, जिला कारागार अधीक्षक राजेन्द्र कुमार, जेलर शैलेश कुमार सिंह सोनकर, उपाधीक्षक अनन्या अत्री सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।


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