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एआई मानव जीवन का अभिन्न अंग : आईटी एक्सपर्ट्स

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तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी- सीसीएसआईटी की सिस्टम मॉडलिंग एंड एडवांसमेंट इन रिसर्च ट्रेंड्स- स्मार्ट-2024 पर दो दिनी 13वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का शंखनाद

मुरादाबाद। अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान- एबीवीआईआईआईटीएम, ग्वालियर के निदेशक प्रो. एसएन सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि कहा, टेक्नोलॉजी समाज कल्याण के लिए है। चाहे साइबर सिक्योरिटी हो, एथिकल इश्यूज़ हों, एथिकल एआई हो, जनरेटिव एआई हो या दीगर उभरती हुई नईं टेक्नोलॉजीज़ सोशल और हयूमन वेलफेयर के लिए ही होनी चाहिए। यूजर्स ही टेक्नोलॉजी का सही मूल्यांकन करते हैं और बताते हैं, टेक्नोलॉजी यूजर्स फ्रैंडली है या नहीं। प्रो. एसएन तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ कंप्यूटिंग साइंसेज़ एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी- सीसीएसआईटी की सिस्टम मॉडलिंग एंड एडवांसमेंट इन रिसर्च ट्रेंड्स पर दो दिनी 13वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस स्मार्ट-2024 में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पहले बतौर मुख्य अतिथि एबीवीआईआईआईटीएम के निदेशक प्रो. एसएन सिंह के संग-संग सिक्योरिटीज फाइनेंस, एसएंडपी ग्लोबल, नोएडा के कार्यकारी निदेशक और प्रौद्योगिकी प्रमुख डॉ. रवि प्रकाश वार्ष्णेय, एसआईएफएस इंडिया फोरेंसिक लैब के प्रबंध निदेशक डॉ. रणजीत कुमार सिंह, सॉफ्टवेयर इंजीनियर गूगल सर्च, माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया- यूएसए के श्री तपिश प्रताप सिंह ने बतौर विशिष्ट अतिथि, टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, कॉन्फ्रेंस जनरल चेयर एवं टीएमयू के फ़ैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आरके द्विवेदी, सीसीएसआईटी के वाइस प्रिंसिपल एवम् कॉन्फ्रेंस चेयर प्रो. अशेन्द्र कुमार सक्सेना आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस स्मार्ट-2024 का शुभारम्भ किया। कॉन्फ्रेंस में ग्वालियर के प्रो. एसएन सिंह को एकेडमिक एक्सीलेंस अवार्ड, जबकि कैलिफोर्निया के श्री तपिश प्रताप सिंह को यंग टेक्नोक्रेट अवार्ड से नवाजा गया। फ़ैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. आरके द्विवेदी ने स्वागत भाषण दिया और कॉन्फ्रेंस की थीम प्रस्तुत करते हुए विस्तार से स्मार्ट की विकाश यात्रा पर प्रकाश डाला। कॉन्फ्रेंस में 11 तकनीकी सत्रों के 05 ट्रैक में 67 रिसर्च पेपर पढ़े गए। इस मौके पर कॉन्फ्रेस का प्रोसीडिंग का विमोचन भी किया गया। संचालन फैकल्टीज़ डॉ. सोनिया जयंत और डॉ. इंदु त्रिपाठी ने किया।
प्रो. सिंह ने कहा, सच यह है, सोसायटी की जरूरतों के हिसाब से टेक्नोलॉजी में तेजी से साल-दर-साल बदलाव हो रहा है। साथ ही हमें इन बदलती तकनीकों से सामंजस्य बैठाना जरूरी है। इंडियन नॉलेज सिस्टम- आईकेएस पर बोले, टेक्नोलॉजी का वास्ता रामायण और महाभारत काल से रहा है। इसके लिए उन्होंने पुष्पक विमान, शब्दभेदी बाण आदि का उदाहरण दिया। हमारे हेलिकाप्टर, मिसाइल या दीगर विमान इन्हीं तकनीकों पर आधारित हैं। किसी भी उत्पाद में तकनीक के संग-संग मैटेरियल्स की भी बड़ी भूमिका है। तकनीकी बदलाव के हम भविष्य वक्ता तो नहीं हो सकते, लेकिन हमें टेक्नोलॉजी के अनुसार खुद को ढालने की दरकार है। उन्होंने युवाओं से कहा, आप यह न देखें कि आप क्या हैं, बल्कि यह विचार करें कि आपके अंदर क्या विशेषताएं हैं। जीवन में नॉलेज और एजुकेशन के संग-संग हार्ड वर्किंग, कमिटमेंट और ऑनेस्टी बेहद महत्वपूर्ण हैं। भूलना एक प्रकृति है, मान लेना संस्कृति है और सुधार कर लेना ही प्रगति है। सही समय पर स्माइल और साइलेंस महत्वपूर्ण हैं।
नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड के सलाहकार/संयुक्त सचिव और प्रौद्योगिकी प्रमुख डॉ. सौरभ गुप्ता बतौर मुख्य अतिथि वर्चुअली बोले, इन्नोवेशन में आज इंडिया विश्व में अग्रणी है। भारत ज्ञान प्राप्ति की सीमाओं का दिनों-दिन विस्तार कर रहा है। इन्नोवेशन और टेक्नोलॉजी में भारत शुरू से मील का पत्थर रहा है। सिस्टम मॉडलिंग ट्रेंड्स गेदर ब्रिलिएंट माइड पर बोलते हुए, डिजिटल इंडिया को वरदान बताया। उन्होंने कहा, ब्लॉक चेन, एआई और आईओटी जीवन का इंटीग्रल पार्ट बन चुके हैं। डॉ. गुप्ता ने उमंग, यूपीआई जैसी सरकारी डिजिटल योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। बोले, यूपीआई ने सबसे अधिक ट्रांजिक्शन करके विश्व में भारत को अव्वल बनाया है। डिजिटल इंडिया में भारत का अग्रणी होना यशस्वी पीएम श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता परिलक्षित होती है। टीएमयू के वीसी प्रो. वीके जैन ने स्मार्ट कॉन्फ्रेंस को टीएमयू की यूएसपी बताते हुए कहा, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस- एआई हमारे जीवन को आसान बनाती है। साथ ही बोले, किसी भी तकनीक के गुण और दोष दोनों है। हमें केवल गुणों पर फोकस करना चाहिए। अनगिनत क्षेत्रों में एआई हमारे मित्र की भूमिका निभाती है। उच्च शिक्षा से संबंद्ध लोगों को एआई से टीचिंग-लर्निंग, रिसर्च, स्मार्ट बिल्डिंग, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी के संग-संग करिकुलम में भी अति महत्वपूर्ण भूमिका है। एक शेर को कोट करते हुए कहा, गुरू के बिना जीवन अधूरा है। शिक्षकों को जामवंत की संज्ञा देते हुए कहा, वह हमारे मार्गदर्शक हैं। उन्होंने स्टुडेंट्स को गुरू और सीनियर्स का आदर करने की पुरजोर वकालत की। उन्होंने स्मार्ट कॉन्फेंस में शिरकत कर रहे स्टुडेंट्स से कहा, खुद को एक्सप्लोर करें। एनालाइज़ करें। डिस्कशन करें। कैलिफोर्निया, यूएस के गूगल सर्च, माउंटेन व्यू, सॉफ्टवेयर इंजीनियर श्री तपिश प्रताप सिंह ने आईओटी और एआई की चुनौतियों और महत्व को गहनता से समझाया। उन्होंने दैनिक जीवन में चैट जीपीटी के सही उपयोग के बारे में भी विस्तार से चर्चा की। सिक्योरिटीज फाइनेंस, एसएंडपी ग्लोबल, नोएडा के कार्यकारी निदेशक और प्रौद्योगिकी प्रमुख डॉ. रवि प्रकाश वार्ष्णेय ने कहा, स्टुडेंट्स को रियल टाइम प्रोजेक्ट पर कार्य करने की दरकार है। स्टुडेंट्स को इन्नोवेटिव एंड क्रिटिकल थिंकिंग और प्रोब्लम सॉलबिंग पर फोकस रहना चाहिए। स्मार्ट कॉन्फ्रेंस में डब्ल्यूआईटी, देहरादून के श्री केसी मिश्रा के संग-संग रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, डॉ. अलका अग्रवाल, प्रो. एसपी सुभाषिनी, डॉ. ज्योति पुरी, डॉ. सुशील कुमार, प्रो. नवनीत कुमार, प्रो. पीके जैन, डॉ. शंभु भारद्वाज, प्रो. आरसी त्रिपाठी, डॉ. संदीप वर्मा, डॉ. रूपल गुप्ता, श्री नवनीत विश्नोई, मिस रूहेला नाज, श्री विनीत सक्सेना, श्री शिव सदन पाण्डेय, श्री दिव्यांशु सक्सेना आदि की उल्लेखनीय मौजूदगी रही।
फॉरेंसिक के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का अभाव: डॉ. रणजीत
एसआईएफएस इंडिया फॉरेंसिक लैब के प्रबंध निदेशक डॉ. रणजीत कुमार सिंह बोले, फॉरेंसिक के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी का अभाव है। सही तथ्य एकत्रित नहीं हो पाते और इसीलिए त्वरित न्याय नहीं मिल पाता है। प्रायः दो टाइप के केस होते हैं- सामान्य और विशेष जांच वाले। दुर्भाग्य यह है, इन दोनों श्रेणी में काम करने वाले लोगों विशेषकर पुलिस हो या वकील या न्यायपालिका में टेक्नोलॉजी की समझ का अभाव है। सही इन्वेस्टीगेशन के लिए तकनीक का सही ज्ञान जरूरी है। समाज में बढ़ते अपराधों के खुलासे में सीसीटीवी कैमरों की अहम भूमिका है। इसीलिए सीसीटीवी कैमरों की समय-समय पर जांच होनी चाहिए, ताकि ये अपडेट रहें। स्टोरेज के लिए उन्होंने लेटेस्ट तकनीक क्लाउड टेक्नोलॉजी को अपनाने पर जोर दिया। स्टुडेंट्स को प्रेरित करते हुए बोले, फॉरेंसिक ही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके साथ एक्सपर्ट शब्द लगता है।
सोशल मीडिया की ख़बरों पर आंख बंद करके विश्वास न करें: प्रो. दिलीप
जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के डीन प्रो. दिलीप के शर्मा ने सस्टेनेबल सोशल एंड इकोनोमिकल इंवायरमेंट ऑफ फेक न्यूज़ पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने फेक न्यूज़ को सामाजिक कलंक बताते हुए इसके दुष्प्रभावों को बताया। साथ ही फेक न्यूज़ की पहचान और इससे बचाव के तौर-तरीकों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फेक न्यूज़ को कुछ उदाहरणों जैसे- क्लिकबेट हैडलाइन, डीपफेक आदि से बचाव को प्रेरित किया। सोशल मीडिया पर सबसे अधिक फेक न्यूज़ होती है, इसीलिए सोशल मीडिया की ख़बरों पर आंख बंद करके विश्वास न करें। उन्होंने फेक न्यूज़ की पहचान के तरीके भी बताए । जैसे- सोर्स की पहचान, तिथि, एक्सपर्ट की सलाह आदि से ख़बर की सत्यता को कन्फर्म किया जा सकता है।


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