निर्यात प्रोत्साहन (एक्सपोर्ट प्रमोशन) की मांग
संस्था ने कहा भदोही व मिर्जापुर की तर्ज पर बदायूँ का कालीन भी बने वैश्विक ब्रांड
अनन्त घोष ब्यूरो
बदायूँ। जनपद में पिछले 70 वर्षों से निर्मित हो रहे ‘नोटिड कार्पेट’ (कालीन) को वैश्विक बाजार दिलाने के लिए ‘बायर’स एंड एक्सपोर्टर्स जॉइंट ऑर्गनाइजेशन’ ने एक बार फिर पुरजोर मांग उठाई है। संस्था ने बिल्सी विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरीश शाक्य को एक स्मरण पत्र सौंपकर बदायूँ में निर्मित कालीन के एक्सपोर्ट प्रमोशन (निर्यात संवर्धन) कराए जाने का आग्रह किया है।
संस्था के प्रबंधक/मंत्री सत्यपाल सिंह सोलंकी ने बताया कि वर्ष 2024 में भी इस संबंध में पत्राचार किया गया था, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। पत्र में आरोप लगाया गया है कि पूर्व में किए गए पत्राचार को संबंधित केंद्रीय मंत्री द्वारा उचित दिशा में नहीं मोड़ा गया, जिससे कालीन निर्यात की प्रक्रिया अधर में लटकी रही। संस्था ने विधायक से मांग की है कि वे केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह से व्यक्तिगत या पार्टी स्तर पर संपर्क कर ‘कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल’ या ‘विकास आयुक्त हैंडिक्राफ्ट’ (भारत सरकार) को आवश्यक आदेश जारी कराने के लिए हस्तक्षेप करें।
संस्था ने जानकारी दी कि बदायूँ के बिल्सी, अंबियापुर, सहसवान और उझानी ब्लॉकों में पिछले सात दशकों से कालीन का निर्माण हो रहा है, लेकिन अभी तक इसे वह पहचान नहीं मिली जिसकी यह हकदार है। संस्था का तर्क है कि यदि भदोही, मिर्जापुर और बनारस के कालीन की तरह बदायूँ के कालीन को भी सरकारी स्तर पर बढ़ावा मिले, तो विदेशी खरीदार सीधे बदायूँ आकर खरीदारी करेंगे। इससे न केवल जिले का औद्योगिक विकास होगा, बल्कि देश को विदेशी मुद्रा भी प्राप्त होगी।
जिले के कई ब्लॉकों में पीढ़ियों से कालीन निर्माण कार्य जारी है। संस्था के अनुसार, पूर्व में स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा प्रयास किए गए, परंतु प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। यदि शासन ने इसे एक्सपोर्ट हब के रूप में मान्यता दी, तो यह स्थानीय बुनकरों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
Budaun Amarprabhat