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शासन से संतोषजनक वार्ता के बाद ग्राम सचिवों का चरणबद्ध सत्याग्रह स्थगित

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संसाधन उपलब्ध होने पर ही लागू होगी ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली

संवाददाता: गोविंद देवल

लखनऊ/प्रदेश।
ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली के विरोध समेत विभिन्न विभागीय समस्याओं को लेकर विगत एक पखवाड़े से चल रहा ग्राम सचिवों का प्रदेशव्यापी चरणबद्ध सत्याग्रह आंदोलन शासन से हुई संतोषजनक वार्ता के बाद स्थगित कर दिया गया है। यह निर्णय निदेशक पंचायती राज, उत्तर प्रदेश से वार्ता के उपरांत ग्राम पंचायत अधिकारी संघ एवं ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के शीर्ष पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक में लिया गया।

प्रदेश ग्राम पंचायत अधिकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाने के बाद ही ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू की जाएगी। उन्होंने बताया कि शासन की मंशा पंचायत सचिवालयों को सशक्त बनाकर सभी ग्राम स्तरीय विभागों के कर्मचारियों को एक स्थान पर बैठकर कार्य कराने की है, ताकि ग्रामीण जनता को एक ही जगह पर सभी विभागीय सुविधाएं मिल सकें।

वार्ता के दौरान निदेशक पंचायती राज ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि ग्राम सचिवों की मांग के अनुरूप उन्हें सरकारी एंड्रॉइड मोबाइल, लैपटॉप, सीयूजी सिम तथा केंद्रीय वित्त के प्रशासनिक मद से डाटा भत्ता उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही अप्रासंगिक हो चुके साइकिल भत्ते के स्थान पर मोटरसाइकिल भत्ता दिए जाने के संबंध में शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सुबाष चंद्र पांडेय ने सरकार से ग्राम सचिवों की शैक्षणिक योग्यता स्नातक करने तथा ग्रेड पे/वेतन मैट्रिक्स लेवल-05 किए जाने पर गंभीरता से विचार करने की मांग की। उन्होंने कहा कि रिजवी समिति की संस्तुतियों के अनुरूप इस संबंध में पुनः वित्त एवं कार्मिक विभाग को प्रत्यावेदन भेजा जाएगा।

वार्ता में यह भी सहमति बनी कि डोंगल से भुगतान की जटिल प्रणाली को सरल बनाते हुए केंद्र एवं राज्य के दो दर्जन से अधिक सॉफ्टवेयर को समाहित कर एकल विंडो प्रणाली विकसित की जाएगी। साथ ही फार्मर रजिस्ट्री, एग्री स्टैक सर्वे, फैमिली आईडी, हेल्थ कार्ड, गौशाला, पीएम सूर्यघर, पराली प्रबंधन, आवारा पशु पकड़ने जैसे अन्य विभागों के कार्य ग्राम सचिवों से न कराए जाने के लिए शासन एवं संबंधित विभागों को पत्र लिखा जाएगा।

मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। मनरेगा के ऑडिट को एक्ट के अनुरूप सामाजिक अंकेक्षण से कराने तथा परफॉर्मेंस ग्रांट की भांति चार्टर्ड अकाउंटेंट का विकल्प दिए जाने पर भी संतोषजनक वार्ता हुई। इसके अलावा 22 अगस्त 2022 को जारी शासनादेश के ग्राम पंचायत स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन और शासकीय क्षति में डोंगल लगाने के लिए सक्षम अधिकारियों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।

शासन से सकारात्मक, सार्थक और कर्मचारी हितैषी वार्ता के बाद ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग के शीर्ष नेतृत्व ने संयुक्त रूप से आंदोलन को अगले कार्यक्रम तक स्थगित करने की घोषणा की।

केंद्रीय बैठक में डॉ. प्रदीप सिंह, सुबाष चंद्र पांडेय, नागेंद्र प्रताप कुशवाहा, रमेश उदैनिया, सूर्यभानु राय, जितेंद्र यादव, जितेंद्र गंगवार, अनिल कुमार यादव, दुर्गा प्रसाद राय, संतोष कुमार, ललित कुमार, मो. नसीम खान, राघवेंद्र सिंह सहित प्रदेश के कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे।


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