संवाददाता: गोविंद देवल | बदायूं
बदायूं जनपद के मालवीय आवास गृह में आज 18 दिसंबर को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंचायत आयोजित हुई। पंचायत में डिप्टी आरएमओ के अनुपस्थित रहने पर जिला अध्यक्ष ने अनिश्चितकालीन धरना की घोषणा कर दी। उन्होंने सभी किसानों से अपील की कि वे अपने-अपने गांव और क्षेत्रों में अगली पंचायत का जोरदार प्रचार-प्रसार करें।
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनके साथ अन्याय कर रहा है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरे वर्ष किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में लगना पड़ता है और प्रत्येक किसान को केवल दो कट्टा खाद मिलता है, चाहे उसके पास दो बीघा जमीन हो या 50 बीघा। उनका कहना है कि खाद वितरण खतौनी के अनुसार होना चाहिए।
किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि जनपद में पांच तहसील होने के बावजूद बिल्सी तहसील में सरकारी क्रय केंद्र क्यों नहीं खोला गया, और यदि खोला गया तो उसे 30 नवंबर को खोलकर 6 दिसंबर को बंद क्यों कर दिया गया। किसानों का कहना है कि अब उनकी लड़ाई सिर्फ धान-बाजरा की खरीद की नहीं, बल्कि जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्येक क्रय केंद्र पर चार-चार केंद्र एक ही स्थान पर दे दिए गए थे, लेकिन खरीद तोले और कांटे के आधार पर 1000 से 1200 कुंतल दिखाया गया, जबकि वास्तविक खरीद केवल 150 या 200 कुंतल थी। पंचायत में विपणन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने से पहले वापस भेज दिया गया, बाद में प्रशासनिक अधिकारी आए और ज्ञापन लिया गया।
ज्ञापन में किसानों ने निम्नलिखित मांगे रखी:
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और खतौनी में अंश निर्धारण के कार्य ग्राम सभा के सचिवालय में होना।
जनपद में धान-बाजरा खरीद पर घोटाले की जांच।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्राम विकास बैंक लिमिटेड द्वारा किसानों से वसूली की गई राशि और धमकी देने वाली कार्रवाइयों की जांच।
बिल्सी नगर पालिका में टूटी पुलिया की मरम्मत और इससे हुए कष्ट की पूर्ति।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रविंद्र सिंह, जिला अध्यक्ष रामा शंकर शंख धार, जिला प्रभारी झाझन सिंह, मंडल सचिव विनोद सक्सेना, जिला महासचिव नरेंद्र सक्सेना, जिला संगठन मंत्री उदयवीर सिंह, तहसील अध्यक्ष सहसवान नत्थू सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष, ग्राम अध्यक्ष और सैकड़ों किसान उपस्थित थे।
किसानों ने प्रशासन से अनुरोध किया कि उनकी समस्याओं का तत्काल और पारदर्शी समाधान किया जाए, अन्यथा वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
Budaun Amarprabhat