संवाददाता: गोविंद देवल
बदायूं। आवास विकास स्थित राजकीय महाविद्यालय बदायूं और ‘एकेडमिक सोसाइटी फॉर ह्यूमैनिटीज एंड लिटरेरी रिसर्च’ (ASHLR) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आईसी-ग्लोबल डायलॉग्स-2026 का शुभारंभ बुधवार को हुआ। हाइब्रिड मोड में आयोजित सम्मेलन के पहले दिन ज्ञान और शोध का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों ने अपने विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि शोध कार्य की अंतःविषय प्रासंगिकता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना जरूरी है। प्राचार्य डॉ. श्रद्धा गुप्ता ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की।
सम्मेलन के पहले दिन चार प्रमुख व्याख्यान आयोजित किए गए। मिहिर भोज पीजी कॉलेज दादरी के प्राचार्य प्रो. किशोर कुमार ने इतिहास, साहित्य, कला और विज्ञान के अंतर्संबंधों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानवीय सभ्यता को समझने के लिए इन सभी विषयों का समन्वय आवश्यक है। राजकीय महाविद्यालय बीसलपुर के डॉ. विकास प्रधान ने ‘विकसित भारत: मार्ग एवं साधन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और नवाचार की भूमिका पर जोर दिया।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी की पूर्व अध्यक्ष एवं एमजीएस यूनिवर्सिटी की पूर्व कुलपति प्रो. चंद्रकला पाडिया ने सामाजिक विज्ञान और मानविकी में वैश्विक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं अंतरराष्ट्रीय अतिथि वक्ता के रूप में इंटरनेशनल विजन यूनिवर्सिटी, नॉर्थ मैसेडोनिया की प्रोफेसर डॉ. डायना जॉर्जिएवा ने बदलते वैश्विक परिवेश में नागरिक कानून की जटिलताओं और उसके समाधानों पर विचार रखे।
तकनीकी सत्रों में देश के विभिन्न राज्यों से आए 30 से अधिक शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से हुए इन सत्रों में शोधार्थियों ने विभिन्न सामाजिक विषयों पर अपने निष्कर्ष साझा किए।
इस अवसर पर ASHLR के सदस्य, महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सम्मेलन का संचालन आयोजन समिति द्वारा किया गया।
Budaun Amarprabhat