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रमजान का आखिरी अशरा रहमत और मगफिरत का पैगाम देता है : हाफिज शरीफ रजा जामी

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बिसौली। रमजान का पवित्र महीना बेशुमार बरकतों और रहमतों वाला होता है। इस महीने में रोजेदारों पर अल्लाह की खास रहमतें बरसती हैं और बंदों के गुनाह माफ किए जाते हैं। इन दिनों रमजान का तीसरा अशरा चल रहा है, जो ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहेगा।
रज़ा मस्जिद के इमाम हाफिज शरीफ रजा जामी साहब ने अपनी तकरीर में कहा कि रमजान के आखिरी अशरे में रोजेदार इबादत में ज्यादा समय बिताकर अल्लाह से मगफिरत और जहन्नुम की आग से पनाह मांगते हैं। इस अशरे में ऐतकाफ की खास अहमियत होती है और इसी दौरान लैलातुल कद्र की मुबारक रातें भी आती हैं।
उन्होंने बताया कि इस आखिरी अशरे में पांच शबे कद्र होती हैं, जिनमें सबसे अफजल और रूहानी 27वीं शबे कद्र को माना गया है। मुसलमानों को चाहिए कि इन रातों में ज्यादा से ज्यादा इबादत कर अल्लाह तआला के दरबार में अपनी हाजिरी दें।
उन्होंने कहा कि रमजान का एक-एक लम्हा रहमतों और बरकतों से भरा होता है। इस महीने में अल्लाह की रहमतें नाजिल होती हैं, रोजेदार अल्लाह का जिक्र करते हैं, तौबा और इस्तगफार करते हैं। साथ ही खैर के काम, नेकी, सदका, खैरात, जकात और फितरा देकर जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। शायद इससे खुश होकर अल्लाह हमारी दुआएं कुबूल फरमाकर हमें दुनिया में अमन और खुशहाली की जिंदगी अता करे।


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