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रामनवमी पर गूंजा मर्यादा का संदेश: “राम जैसे बनो, तभी सुखी होगा जीवन”

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गुधनी के प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में वैदिक यज्ञ व रामकथा, आचार्य संजीव रूप ने बताए सुखी जीवन के दो मूल मंत्र

संवाददाता: गोविंद देवल
बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ ग्राम गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रामनवमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। आर्य समाज के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने विधिवत यज्ञ कराया और रामकथा का भावपूर्ण वाचन किया।
रामकथा के दौरान आचार्य संजीव रूप ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि यदि लोग भगवान श्रीराम की दो शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार लें, तो हर व्यक्ति सुखी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि पहली शिक्षा अभिवादन की भावना है—
“प्रातः काल उठकर रघुनाथा, मात-पिता गुरु नावहि माथा”
अर्थात हर व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरु और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। इससे आयु, विद्या, यश और बल की वृद्धि होती है। उन्होंने चिंता जताई कि आज के समय में बुजुर्गों की उपेक्षा बढ़ रही है, जो समाज के लिए चिंताजनक है।
दूसरी शिक्षा वचनबद्धता की है—
“रघुकुल रीति सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई”
आचार्य ने कहा कि जो व्यक्ति अपने वचन का पालन करता है, वही समाज में सम्मान पाता है।
उन्होंने अंत में संदेश दिया—
“सीताराम-सीताराम कहिए, जाहिं विधि रहे राम ताहि विधि रहिए”
कार्यक्रम में विश्वजीत पाल, बद्री प्रसाद आर्य, भानु प्रकाश सिंह, गौरव उपाध्याय, राकेश शाक्य, नेमपाल कोहली, जयप्रकाश कोहली, सुखबीर सिंह, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती कमलेश कुमारी व आचार्य तृप्ति आर्य सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
संदेश साफ:
👉 राम के आदर्श अपनाओ, जीवन में सुख-शांति खुद आ जाएगी!


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