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*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन जब निजीकरण करने में असफल रहा तो एक सोची समझी रणनीति के तहत पहले अपने आदेश का उलंघन कर जिन विद्युत उपकेंद्रों 36 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात किया जाता था उन विद्युत उपकेंद्रों पर 18.5 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात किया गया तथा शेष आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य से हटा दिया गया जिससे कर्मचारियों कि भारी कमी हो गई, इसके बावजूद भी पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन अपने मंसूबों में सफल नहीं हुआ यह कहना है संगठन के महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय का।
उन्होंने कहा कि संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों कि भारी कमी के कारण उपभोक्ताओं को बिजली संकट से सम्बंधित तमाम समस्याओं से जूझना पड़ा, लेकिन बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा दिनों रात एक कर अपनी जान को जोखिम में डालकर उपभोक्ताओं को बिजली से सम्बंधित समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया गया।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि जब पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हुआ तो वर्टिकल व्यवस्था लागू कर 36 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों के स्थान पर 7.5 बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात करने के लिए वितरण निगमों से BOD जारी कराकर बिजली व्यवस्था को पटरी से उतारने का प्रयास किया गया लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा फिर भी पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन के मंसूबे पर पानी फेरने का कार्य किया।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन सरकार को बदनाम करने के लिए अकुशल कर्मचारियों से लाइन का कार्य कराकर उनकी हत्याये करा रहा जिसकी संगठन घोर निन्दा करता है।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन बिजली विभाग को निजी हाथों में देने के लिए अकुशल श्रमिकों कि हत्याये कराने से बाज आए अन्यथा 24 जून 2026 को शक्ति भवन लखनऊ पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
Budaun Amarprabhat