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विद्युत संविदा कर्मचारियों ने की बैठक, पूर्व विधायक प्रतिनिधि के बयान पर जताया आक्रोश

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24 जून को लखनऊ शक्ति भवन पर होने वाले धरना-प्रदर्शन को सफल बनाने की रणनीति तैयार
बदायूं। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ के बैनर तले विद्युत संविदा कर्मचारियों ने मदनलाल इंटर कॉलेज के प्रांगण में एक आवश्यक बैठक का आयोजन किया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 24 जून को लखनऊ के शक्ति भवन पर आयोजित होने वाले प्रदेश व्यापी धरना-प्रदर्शन को सफल बनाना और कर्मचारियों को एकजुट करना रहा। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कर्मचारियों से अधिक से अधिक संख्या में लखनऊ पहुंचने की अपील की।
बैठक में बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर के प्रतिनिधि मनोज शर्मा द्वारा सोशल मीडिया पर विद्युत संविदा कर्मचारियों के संबंध में दिए गए एक बयान को लेकर गहरा आक्रोश देखा गया। संघ के जिलाध्यक्ष धीरेंद्र कुमार सिंह ने इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि विद्युत संविदा कर्मचारी अत्यंत विषम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी पूरी निष्ठा व ईमानदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में इस तरह का बयान जमीनी स्तर पर काम करने वाले मजदूरों का मनोबल तोड़ने वाला है।
कर्मचारियों को संबोधित करते हुए संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष हर्षवर्धन ने पावर कॉरपोरेशन की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कॉरपोरेशन ने अपने ही 15 मई 2017 के आदेश का उल्लंघन करते हुए प्रदेश भर में लगभग 25 हजार विद्युत संविदा कर्मचारियों को सेवा से हटा दिया है। अकेले बिसौली डिवीजन से ही 120 कर्मचारियों को हटाया गया है, जिसके कारण बचे हुए स्टाफ पर काम का मानसिक और शारीरिक दबाव अत्यधिक बढ़ गया है।
प्रदेश उपाध्यक्ष ने सुरक्षा और दुर्घटनाओं के चौंकाने वाले आंकड़े साझा करते हुए बताया कि बीते 22 अप्रैल से 28 मई के बीच, यानी मात्र 37 दिनों के भीतर पूरे प्रदेश में 36 विद्युत दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन हादसों में 23 संविदा कर्मचारियों की असामयिक मृत्यु हो चुकी है, जबकि 14 कर्मचारी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में हताहत होने के बावजूद कॉरपोरेशन प्रबंधन इस संवेदनशील मुद्दे का संज्ञान नहीं ले रहा है।
संघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि हटाए गए संविदा कर्मचारियों को सरकार तत्काल काम पर वापस बहाल करे, अन्यथा उनका यह लोकतांत्रिक आंदोलन और उग्र रूप अख्तियार करेगा। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से अमर सिंह, धर्मेंद्र, जगदीश, धर्मवीर, रंजीत, प्रदीप कुमार, बिजेंदर, रविंदर, अशोक, शिवम, रूपेंद्र, अरविंद, ललित और प्रदीप सिंह समेत बड़ी संख्या में विद्युत संविदा कर्मचारी उपस्थित रहे।


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