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2027 के महासंग्राम से पहले यूपी में छिड़ा पोस्टर वॉर, बदायूं कटरा कांड को लेकर सपा पर सीधा वार

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बदायूं सहित प्रदेश के 10 बड़े जिलों में रातों-रात टांगे गए अखिलेश यादव के विवादित होर्डिंग्स, मचा हड़कंप
भड़के सपा कार्यकर्ताओं ने फाड़े पोस्टर, भाजपा पर लगाया गिरते जनाधार और बदनामी की साज़िश रचने का आरोप
सपा का पलटवारः हाथरस और कुलदीप सेंगर कांड भूल गई भाजपा? 2027 में जनता सिखाएगी सबक


अमर प्रभात ब्यूरो
बदायूं। उत्तर प्रदेश में साल 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त भारी भूचाल आ गया, जब बदायूं समेत सूबे के 10 बड़े जिलों में रातों-रात समाजवादी पार्टी के खिलाफ बेहद तीखे और विवादित होर्डिंग्स लगा दिए गए। इस पोस्टर वॉर के केंद्र में साल 2014 का बहुचर्चित बदायूं कटरा कांड है।
बदायूं के नवादा क्षेत्र सहित प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, हरदोई, कानपुर, शाहजहांपुर, कन्नौज, उन्नाव और कानपुर देहात में आज सुबह-सुबह ऐसे होर्डिंग्स लगे दिखाई दिए, जिसने राजनीतिक खेमों में हलचल मचा दी है। इन पोस्टरों में सपा मुखिया अखिलेश यादव को एक धार्मिक टोपी पहने दिखाया गया है, और उनके ठीक पास एक छोटी बच्ची अपने हाथों से चेहरा ढके, बदहवास हालत में बैठी नजर आ रही है।
इन होर्डिंग्स पर बड़े और मोटे अक्षरों में सपा को घेरते हुए लिखा गया है- “महिला विरोधी सपाई… बेटियों की चीखें, गुंडों का शोर, सपा राज में यही था दौर।” राजनीतिक जानकारों की मानें तो इन पोस्टरों के जरिए ठीक 12 साल पहले यानी 2014 में अखिलेश सरकार के दौरान हुए बदायूं कटरा कांड को दोबारा हवा देने की कोशिश की गई है, जिसमें शाक्य समाज की दो नाबालिग बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।
सुबह जैसे ही इस विवादित होर्डिंग की खबर शहर में फैली, समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी रोष फैल गया। आक्रोशित सपा कार्यकर्ताओं ने तत्काल सड़कों पर उतरकर नवादा क्षेत्र समेत अन्य जगहों पर लगे सभी होर्डिंग्स को फाड़ डाला। हालांकि, इन पोस्टरों पर किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति का नाम नहीं लिखा है और न ही किसी ने इसकी जिम्मेदारी ली है, लेकिन सपा ने सीधे तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को इस साज़िश के पीछे जिम्मेदार ठहराया है।
इस पूरे घटनाक्रम पर अमर प्रभात से विशेष बातचीत करते हुए सपा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की जनता ने एकजुट होकर समाजवादी पार्टी को बड़ी जीत दिलाई थी। आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा सरकार बनाने जा रही है। इसी हार के डर से भाजपा घबराई हुई है। बीजेपी के पास जनता के बीच जाने का कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष को बदनाम करने के लिए ऐसी घटिया साज़िशें रच रहे हैं।
अशोक यादव ने आगे कहा कि आज प्रदेश में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं और महंगाई से जनता त्रस्त है। डीजल, पेट्रोल और गैस के दाम लगातार आसमान छू रहे हैं। भाजपा की जो नेत्रियां पहले 400 रुपये के सिलेंडर पर छाती पीटती थीं, वे आज बढ़ती कीमतों पर खामोश हैं। जनता का ध्यान भटकाने के लिए रातों-रात बेनाम पोस्टर टांगे जा रहे हैं।
वहीं सपा नेत्री इन्दु सक्सेना ने कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भाजपा को आड़े हाथों लेते हुए इतिहास की कुछ बड़ी घटनाओं की याद दिलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हाथरस कांड हुआ, जहां एक बेटी की हत्या के बाद पुलिस-प्रशासन ने रात के अंधेरे में ही शव को जला दिया। यही नहीं, उन्नाव में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर द्वारा एक युवती के साथ जो किया गया, उसकी तो शुरुआत में एफआईआर तक दर्ज नहीं होने दी गई थी।
फिलहाल, इस पोस्टर वॉर को लेकर न तो भाजपा और न ही किसी अन्य विपक्षी दल का कोई आधिकारिक बयान आया है। लेकिन चुनावी साल से ठीक पहले उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में एक साथ इस तरह की होर्डिंग बाजी होना साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में यूपी की सियासी जंग बेहद आक्रामक और दिलचस्प होने वाली है।


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