बिल्सी ,तहसील क्षेत्र के तीर्थ गुधनी ग्राम में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया । यज्ञ मंदिर की भव्य यज्ञशाला में विश्व शांति और राष्ट्र कल्याण की भावना के साथ यज्ञ किया गया ! ऋग्वेद के प्रथम मंडल के तीसवें सूक्त के मंत्रों से आहुति दी गई ! सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ कराते हुए -वेद मंत्रों की व्याख्या भी की ! उन्होंने कहा “किसी पूजा पद्धति , किसी मत मजहब के तौर तरीके का नाम धर्म नहीं होता , न ही तिलक छाप कलावा चोटी दाड़ी टोपी धर्म के चिन्ह हैं , धर्म तो वह व्यवहार है जिसे जीवन में धार कर जीवन को घर परिवार समाज व राष्ट्र को श्रेष्ठ बनाया जाता है । कभी कोई सांप्रदायिक व्यक्ति समाज व राष्ट्र तथा मानवता का हितैषी नहीं हो सकता किंतु एक धार्मिक व्यक्ति ही सबका पोषक होता है । धर्म के 10 लक्षण बताए गए हैं धैर्य , क्षमा , इंद्रियों का दमन , चोरी न करना , तन मन की शुद्धि , ज्ञान , विद्या , सत्य , क्रोध न करना ! संत कहते हैं कि जो व्यवहार तुम्हें औरों से प्रिय नहीं है वह व्यवहार तुम भी किसी के साथ मत करो यही धार्मिकता है ! किसी कवि ने बड़ा अच्छा कहा है “आदत बुरी सुधार लो बस हो गया भजन , मन की तरंगे मार लो बस हो गया भजन ! आचार्य संजीव रूप ने कहा आज भगवान के नाम पर पूजा प्रार्थना के नाम पर लोग सोना चांदी रुपया मंदिरों में चढ़ाते हैं जो चोरी तथा अनेक प्रकार के अपराध का पाखंड का कारण बनता है । मंदिरों में देवी देवताओं को तो केवल फल फूल दुग्ध जल मिष्ठान ही समर्पित करना चाहिए क्योंकि यही उनके प्रिय होते हैं । किसी शास्त्र में नहीं लिखा कि सोना चांदी रुपया भगवान को चढ़ाना चाहिए । इस अवसर पर महिलाओं ने सुंदर भजन गाए । कुमारी तृप्ति आर्य तुम्हारी कौशिकी आर्य , कुमारी तान्या आर्य ने वेद पाठ किया ।कार्यक्रम में श्रीमती कमलेश कुमारी, बद्री प्रसाद आर्य ‘ , श्रीमती सूरजवती देवी , श्रीमती कविता ,श्रीमती संतोष कुमारी ,राकेश आर्य तथा आर्य संस्कारशाला केबच्चे मौजूद रहे
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