अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय) ने सुनाया फैसला
दोषी को विभिन्न धाराओं में कुल 10 वर्ष की सजा
बदायूँ। जनपद की अदालत ने एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और दुष्कर्म के दोषी को कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय (महिलाओं के विरुद्ध अपराध) श्रीमती नेहा गर्ग की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए दोषी शाकिर हुसैन को दोषी करार दिया और उसे विभिन्न धाराओं में कुल 10 वर्षों के कठोर कारावास व भारी अर्थदंड से दंडित किया है।
मामले की जानकारी के अनुसार, बदायूँ के बिल्सी थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी पत्नी और 10 वर्षीय बेटी मार्च 2025 में घर से लापता हो गईं। शिकायतकर्ता ने ग्राम रिसोली निवासी शाकिर हुसैन पर बहला-फुसलाकर उन्हें ले जाने का संदेह व्यक्त किया था। पुलिस ने मामले की गहन जांच की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी शाकिर हुसैन के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किया।
अदालत ने पत्रावली पर मौजूद सबूतों, गवाहों के बयानों और अभियोजन पक्ष के तर्कों को अत्यंत गंभीर मानते हुए दोषी शाकिर हुसैन को कठोरतम सजा सुनाई है। अदालत द्वारा सुनाए गए दंडादेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
धारा 64(2)(m) बीएनएस: 10 वर्ष का कठोर कारावास व 50,000 रुपये का अर्थदंड।
धारा 87 बीएनएस: 7 वर्ष का कठोर कारावास व 20,000 रुपये का अर्थदंड।
धारा 137(2), 351(3) बीएनएस तथा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम: इन धाराओं के तहत 5-5 वर्ष का कठोर कारावास व 10,000-10,000 रुपये का अर्थदंड।
धारा 127(4) बीएनएस: 3 वर्ष का कठोर कारावास व 10,000 रुपये का अर्थदंड।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि अर्थदंड न भरने की स्थिति में दोषी को अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। साथ ही, मामले की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। दोषी द्वारा जेल में बिताई गई अवधि को कुल सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
Budaun Amarprabhat