*
_________________________
👉 *आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कुसुम लता यादव ने मिशन निदेशक का आभार व्यक्त किया*
*लखनऊ।* राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि चिकित्सालयों में आशाओं को विश्राम के लिए तथा उनके रुकने की व्यवस्था किए जाने के संबंध में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रयास से 2025 में शासनादेश जारी किया गया था, जिसके माध्यम से आशाओं को अस्पतालों में रुकने की कठिनाई को देखते हुए अलग से कक्ष निर्धारित करने के निर्देश दिए गए थे। जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में कार्यरत आशाओं के माध्यम से सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है।
इस कार्य में आशाओं को निरंतर कई बार चिकित्सालयों तक आना पड़ता है एवं कतिपय कारणों से चिकित्सालय में रुकना भी पड़ता है। इन परिस्थितियों के दृष्टिगत आशाओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं समस्त जिला/ महिला संयुक्त चिकित्सालय में बैठने रुकने के लिए एक कक्ष चिन्हित करने की निशांत आवश्यकता महसूस की जा रही थी। 4 मार्च 2025 के शासनादेश द्वारा आशाओं की समस्या का समाधान किया गया था।
आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष कुसुम लता यादव ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद को अवगत कराया था कि मार्च 2025 के शासनादेश का जनपदों के चिकित्सालय में अनुपालन नहीं हो रहा है तथा आशाओं के लिए कक्ष आवंटित नहीं किया गया है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने इस संबंध में लगातार पत्राचार कर चिकित्सालयों में आशाओं के बैठने तथा विश्राम के लिए अलग कक्ष आवंटित करने की मांग दोहराती रही है।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद एवं आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष कुसुम लता यादव के प्रयास से मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा 3 अक्टूबर 2026 को चिकित्सालय में आशाओं के रुकने, बैठने के लिए “आशा कक्ष” की व्यवस्था किए जाने के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि निर्गत निर्देश के अंतर्गत चिकित्सा विद्यालयों ,चिकित्सा संस्थानों ,स्वास्थ्य केंद्रों एवं समस्त जिला/ महिला संयुक्त चिकित्सालयों में एक अतिरिक्त कक्ष की व्यवस्था “आशा कक्ष” के रूप में किए जाने, कक्ष के बाहर पठनीय अक्षरों में “आशा कक्ष” का लेखन कराए जाने, “आशा कक्ष’ में नियमित विद्युत आपूर्ति, पंखा तथा पेयजल की व्यवस्था किए जाने तथा आशाओं के विश्राम के लिए आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था किए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉक्टर पिंकी जोवल द्वारा निर्गत इस आदेश का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि महिला कर्मचारियों की समस्याएं पुरुष कर्मचारियों से अलग होती हैं।
महिलाओं के लिए विश्राम करने तथा सुरक्षित स्थान पर बैठकर मरीजों से बातचीत करने के लिए एक अलग स्थान की आवश्यकता होती है। ‘आशा कक्ष’ का आवंटन महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सराहनीय कदम है। शासन के इस कदम से आशाओं को समाज में सम्मान मिलेगा तथा उनके कार्य का महत्व भी प्रतिपादित होगा।
आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष कुसुम लता यादव ने भी मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉक्टर पिंकी जोवल का “आशा कक्ष” आवंटित किए जाने के संबंध में निर्गत किए गए आदेश के लिए आभार व्यक्त किया है।
Budaun Amarprabhat