बदायूं। स्थानीय श्री सीताराम मंदिर में चल रही संगीतमयी श्री रामकथा का रविवार को विधि-विधान एवं हवन-पूजन के साथ भव्य समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य मुमुक्ष कृष्ण महाराज ने किष्किंधा कांड से लेकर उत्तर कांड तक के प्रसंगों का भावपूर्ण एवं विस्तारपूर्वक वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास ने किष्किंधा कांड के माध्यम से सच्ची व निस्वार्थ मित्रता की महत्ता समझाई। सुंदरकांड के प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि सिंहिका वास्तव में ‘ईर्ष्या’ का प्रतीक है, जो सदैव अपने से ऊपर वालों पर कुठाराघात करती है। लंकाकांड के जरिए उन्होंने युद्ध की मर्यादा और उत्तरकांड के माध्यम से कलयुग में प्रभु नाम की महिमा का बखान किया।
कथा विश्राम के अवसर पर श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ का पूजन किया। मुख्य यजमानों द्वारा पूर्णाहूति के साथ राम यज्ञ संपन्न कराया गया। इसके उपरांत ब्रह्मभोज एवं विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। व्यवस्थाओं में मुख्य यजमान अर्जुन लाला गुप्ता, हरिओम रस्तोगी, पंडित बालमुकुंद महेरे व पुरोहित प्रदीप महेरे का सराहनीय सहयोग रहा।
इस दौरान कवि महेश मित्र, कामेश पाठक, विप्र नेता राजेश शर्मा, डॉ. उमा सिंह गौर, दुलारी खुराना, मारुत सक्सेना, अजय मिश्र, सुनील सपड़ा, नामित सदस्य के.एल. गुप्ता, आचार्य गुरुचरण मिश्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
Budaun Amarprabhat