सत्कर्म और सच्चरित्रता ही सफलता की कुंजी : आचार्य संजीव रूप
वेद कथा में लाल बहादुर शास्त्री के सादगीपूर्ण जीवन और उच्च चरित्र को किया याद
बदायूं। शहर के ओम स्वरूप लॉन, दातागंज रोड पर पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान ट्रस्ट समिति, बदायूं के तत्वावधान में आयोजित वेद कथा में अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप ने कहा कि सत्कर्म और सच्चरित्रता ही सफलता का आधार है। मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद और धन से नहीं, बल्कि उसके श्रेष्ठ कर्म और चरित्र से होती है।
वेद कथा से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया गया। आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यज्ञ भारतीय वैदिक संस्कृति का अभिन्न अंग है। यज्ञ मनुष्य को त्याग, सेवा, अनुशासन और लोककल्याण की प्रेरणा देता है।
वेद कथा में आचार्य संजीव रूप ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को भी श्रद्धापूर्वक याद किया। उनके जीवन और चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि शास्त्री जी ने सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का आदर्श प्रस्तुत किया। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि व्यक्ति की महानता उसके पद से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और कर्मों से होती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एमएलसी जितेन्द्र यादव ने भी वेद कथा का श्रवण किया तथा अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने वैदिक विचारों को जन-जन तक पहुंचाने तथा समाज में संस्कार और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने वाले ऐसे आयोजनों के महत्व पर प्रकाश डाला।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, संयम, परिश्रम, सेवा और सदाचार को अपनाए। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ कर्म ही मनुष्य को श्रेष्ठ बनाते हैं और सच्चरित्रता ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।
कार्यक्रम में पतंजलि योग समिति, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के पदाधिकारी, वेदप्रेमी, श्रद्धालु एवं शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
Budaun Amarprabhat