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बिल्सी ‘ आर्य समाज गुधनी में आर्य समाज गुधनी के संरक्षक मास्टर भीकम सिंह जी के निधन के पश्चात श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अंतर्राष्ट्रीय वेद कथाकार आचार्य संजीव रूप के सान्निध्य में सामूहिक यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ के पश्चात उपस्थित लोगों ने दिवंगत मास्टर भीकम सिंह जी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर आचार्य संजीव रूप ने प्रवचन देते हुए वैदिक जीवन मूल्यों, सदाचार और समाजसेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य के श्रेष्ठ विचार और सत्कर्म ही उसे समाज में स्मरणीय बनाते हैं। उन्होंने वैदिक सिद्धांतों को जीवन में अपनाने तथा समाज के कल्याण के लिए कार्य करने का संदेश दिया।आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मास्टर भी कम से हिंदी वेद के अनुकूल अपना जीवन जीते थे प्रताप ब्रह्म मुहूर्त में उठते थे और 4:00 बजे स्नान करने के पश्चात 1 घंटे ध्यान करते थे और 1 घंटे योग्य प्राणायाम करते थेउनका खान-पान एकदम सात्विक शाकाहारी था वह अपने सारे काम खुद करते थे हम सबको यदि श्रद्धांजलि देनी है तो उनके प्रति यही श्रद्धांजलि होगी कि हम भी उनके आदर्शों को अपने जीवन में धारें ।
श्रद्धांजलि सभा में स्वामी शुद्धबोधानंद जी महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, बरेली से पधारे आर्य समाज के भजनोपदेशक पंडित यशदेव आर्य ने भी संबोधित करते हुए अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में सामूहिक यज्ञ, वैदिक प्रवचन और श्रद्धांजलि के माध्यम से महर्षि भीकम सिंह जी के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
श्रद्धांजलि सभा में 500 से अधिक लोगउपस्थित रहे !
Budaun Amarprabhat