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बदायूं के कई परिषदीय विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था एकल शिक्षक/शिक्षा मित्र के भरोसे , जिम्मेदार मौन

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बदायूं के कई परिषदीय विद्यालयों की शिक्षण व्यवस्था एकल शिक्षक/शिक्षा मित्र के भरोसे , जिम्मेदार मौन

समायोजन/तबादले से कोई विद्यालय एकल या शिक्षक विहीन होना ही नहीं चाहिए था। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पहले ही यह जांच पड़ताल करनी चाहिए थी।ये स्पष्ट निर्देश थे।अगर ऐसा है तो कार्यवाई की जाएगी। – सुरेंद्र तिवारी सचिव बेसिक शिक्षा परिषद

बदायूँ – उतर प्रदेश में योगी सरकार के अधिकारी ही सरकार की छवि खराब कराने में कमी नहीं छोड़ रहे हैं जनपद के कई परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था एकल शिक्षक या शिक्षक विहीनहोने कारण राम भरोसे ही चल रही है। एक अध्यापक / शिक्षा मित्र पांच कक्षाओं का संचालन और अन्य विभागीय कार्य कैसे सम्पन्न करा पा रहे होंगे आप कल्पना कर सकते हैं।
इसका जीता जागता उदाहरण है जनपद के कई विद्यालयों में स्थानांतरण/ समायोजन में शिक्षा विभाग के आदेशों की अवहेलना की गई जिसके कारण ऐसे विद्यालयों से भी शिक्षकों के ट्रांसफर / समायोजन कर दिए जहां पहले से शिक्षक कम थे। वर्तमान समय में जनपद के कई विद्यालय शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक रह गए हैं इस वजह से उन विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था, नौनिहालों का भविष्य अधर में लटक गया है। जहां प्राथमिक विद्यालयों में मानक के अनुसार पांच अध्यापक होने चाहिए परन्तु वहां एकल शिक्षक या शिक्षक विहीन , एक शिक्षा मित्र के सहारे चल रहे हैं। शिक्षा मित्रों को स्थानांतरण में अध्यापक नहीं गिना गया है।
ऐसी स्थिति अन्य जनपदों में भी उत्पन्न हुई है इसके कारण जनपद हमीरपुर व सुल्तानपुर के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने स्थानांतरण/ समायोजन से एकल शिक्षक/ शिक्षक विहीन विद्यालयों के स्थानांतरित/ समायोजित अध्यापकों को पुनः वापस मूल विद्यालय में भेजने का आदेश खंड शिक्षा अधिकारियों को किया है। परंतु जनपद बदायूं के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जनपद के विद्यालयों में उत्पन्न हुई इस समस्या पर अब तक ध्यान नहीं दिया है। पता नहीं कब आदेश होगा मूल विद्यालय वापसी का इस पर शिक्षा विभाग के अधिकारी मौन है।
अब देखने वाली बात यह होगी शिक्षा विभाग कब नौनिहालों के भविष्य लिए, शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए मानक के अनुसार अध्यापक उपलब्ध करा पाता है।
इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बदायूं वीरेंद्र कुमार सिंह से उनका वर्जन लेने का प्रयास किया तो उनका फोन (सीयूजी नंबर) रिसीव न हुआ।


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