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जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए. अहंकारी को कभी भगवान की भक्ति नहीं मिलती है.

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बदायूँ
मोहल्ला चौवे के ठाकुर महाराज जी के मंदिर में चल रही श्री भागवत कथा के छटे दिन कथा व्यास आचार्य कृष्ण कार्तिकेय वृजानुरागी जी ने कहा व्यक्ति को जीवन में कभी अहंकार नहीं करना चाहिए. अहंकारी को कभी भगवान की भक्ति नहीं मिलती है.
गोवर्धन लीला का प्रसंग सुनाते हुए आगे बतलाया कि इंद्र का अहंकार तोडने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन का पूजन बृजबासियों से कराया. भगवान के नाम से व्यक्ति के बडे से बडे पाप दूर हो जाते है. परमात्मा की चरणाभक्ति से जीवन का भय दूर हो जाता है. बोले जो गोवर्धन में मानसी गंगा की बडी महिमा है. मानसी गंगा में स्नान करते हैं उनके मन के भी सारे पाप धुल जाते हैं और गोवर्धन की परिक्रमा से प्राणी का उद्धार हो जाता है.
कथा में भक्तों श्रृद्धा से गोवर्धन महाराज पूजन किया. छप्पन प्रकार के पकवानो से गोवर्धन का भोग लगाया गया.देर तक चली कथा में कथा व्यास ने कथा के बीच बीच में मधुर कंठ से जब भजन सुनाए तो श्रृद्धालु झूमते आए.कथा के मुख्य यजमान अशोक गुप्ता ने सपत्नीक भागवत का पूजन किया. कथा में पंडित हरीशंकर, कवि कामेश पाठक, राजीव शर्मा, सहित सैकडो भक्तगण मौजूद रहे.


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