बदायूँ। साहित्य, संस्कृति और कला को समर्पित संस्था ‘आचमन फाउंडेशन’ के तत्वावधान में ‘गीत गुलमोहर गीत निशा’ का गरिमामयी आयोजन संपन्न हुआ। हिंदी पखवाड़े तथा प्रख्यात साहित्यकार डॉ. उर्मिलेश के जन्म जयंती वर्ष को समर्पित इस विशेष संध्या में मैनपुरी (किशनी) से पधारे वरिष्ठ गीतकार बलराम श्रीवास्तव को प्रथम ‘गीत गुलमोहर सम्मान-2026’ से अलंकृत किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अपर पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) डॉ. हृदेश कठेरिया ने दीप प्रज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया। इसके उपरांत उन्होंने बलराम श्रीवास्तव को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शशि श्रीवास्तव को भी संस्था द्वारा सम्मानित किया गया। पुष्प-प्रेम की अनूठी संकल्पना को साकार करते हुए फाउंडेशन की संस्थापिका डॉ. सोनरूपा विशाल ने बलराम श्रीवास्तव को उपहार स्वरूप ‘मधुमालती’ की बेल भेंट की और आशा जताई कि यह उनके आंगन में महकते हुए इस साहित्यिक मिलन की स्मृति को सदैव जीवंत रखेगी।
वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र गरल की अध्यक्षता में आयोजित इस गोष्ठी का संचालन डॉ. उपदेश शंखधार ने किया। उन्होंने बलराम श्रीवास्तव के साहित्यिक योगदान पर परिचयात्मक आलेख प्रस्तुत किया। काव्य निशा में बलराम श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिनिधि पंक्तियों—
“बुझ न जाए कहीं गीत का ये दिया, वरना उपवन ही श्मशान हो जाएगा। चुटकुलों को अगर हमने कविता कहा, गीत का गाँव वीरान हो जाएगा।”
के माध्यम से गीत की शुचिता और उसकी मूल संवेदना की रक्षा का आह्वान किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री नरेंद्र गरल ने— “लिए शाकल्य बैठे हैं, हवन करके दिखा देंगे, कथाएँ वेदनाओं की श्रवण करके दिखा देंगे”— जैसी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। गोष्ठी में बिल्सी से आए श्री सुबीन माहेश्वरी, डॉ. अक्षय अशेष एवं डॉ. उपदेश शंखधार ने भी काव्य पाठ किया।
मूसलाधार वर्षा और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन उपस्थित रहे। इनमें श्री गोपाल कृष्ण मिश्र, डॉ. गीतम सिंह, भारतेंद्र मिश्र, प्रदीप शर्मा, मधु शर्मा, सुषमा भट्टाचार्य, अमोल पाराशर, डॉ. कमला माहेश्वरी सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। अंत में संस्थापिका डॉ. सोनरूपा विशाल ने आभार जताया तथा सह-संयोजक श्री विशाल रस्तोगी ने निरंतर ऐसे आयोजनों के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन किया।
Budaun Amarprabhat